आज शिव-गौरा पुत्र गजनायक गणेश के जन्मदिन का अवसर है।

गजनायक के जन्मदिन का यह शुभ अवसर देश भर में गणेश चतुर्थी की धूम के साथ मनाया जाएगा। देश के महाराष्ट्र व मध्यप्रदेश राज्य में गणपति बप्पा के नारों के साथ विशेष धूम में मची रहेगी।

राज्य भर में विशेष धूम के साथ पंडाल सजेंगे। गणपति बप्पा की मूर्तियाँ घरों में स्थापित की जाऐंगी।

आज से शुरू होकर अगले 10 दिनों तक इस विशेष पर्व को हर्षोल्लास के साथ भक्तों द्वारा मनाया जाएगा।
![]()
सभी देवों में सर्वप्रथम पूजे जाने वाले गजनायक के जन्मदिन का क्या रहेगा शुभ मुहुर्त और क्या रहेगी विशेष पूजन विधी आइये जानते हैं।

हिंदु धर्म के पंचागों के अनुसार गजनायक की मूर्ती को घर में स्थापित करने के यह समय शुभ मुहुर्त माने जाएंगे-

अमृत चौघड़ियाः यह किसी भी कार्य के लिए बेहद शुभ मुहुर्त माना जाता है। आज के दिन अमृत चौघड़िया का शुभ मुहुर्त प्रातः 6 बज कर 10 मिनट से लेकर 7 बजकर 44 मिनट तक का रहेगा।

शुभ चौघड़ियाः यदि आप प्रातः काल घर में बप्पा की मूर्ति स्थापित ना कर पाये हों तो दूसरा शुभ मुहुर्त का भी विकल्प आपको मिलता है। सुबह 9 बज कर 18 मिनट से लेकर 10 बज कर 53 मिनट पर शुभ चौघड़िया के शुभ मुहुर्त पर आप मूर्ति की स्थापना कर सकते हैं।

लाभ चौघड़ियाः लाभ चौघड़िया एक अन्य शुभ मुहुर्त आपको बप्पा की मूर्ती स्थापित करने के लिए मिलता है। यह समय दोपहर 3 बजकर 35 मिनट से प्रारंभ हो 5 बजकर 9 मिनट तक का रहेगा।

इसके अलावा अमृत चौघड़िया का प्रातः काल के बाद शांय का भी शुभ मुहुर्त बन रहा है। यह शाम 5 बजकर 9 मिनट से लेकर 6 बजकर 53 मिनट तक का रहेगा।

शुभ मुहुर्त के बाद बात कर लेते हैं बप्पा के विशेष पूजन कीः
गणपति के विशेष पूजन का लाभ आपको घर की सुख-समृद्धि और कार्य में सफलता के रूप में मिलती है। इसके लिए प्रातः काल स्नान कर गणेश जी के किसी मंदिर में दूर्वा की 11 गाँठ अर्पित करें।

गणेश जी को मोदक और लड्डू का भोग अवश्य लगाऐं। सभी मनोरथों को पूरा करने हेतू यह भोग आवश्यक माना जाता है।

इसके साथ ही गणेश जी को सिंदूर भी चढ़ाएं। हिंदू धर्मों की विशेष मान्यता है कि गणेश जी को सिंदूर चढ़ाने से सभी विघ्नों का अंत होता है। वहीं यह कार्य गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर किया जाए तो परिणाम अत्यंत शुभ होंगे।

देश भर में विशेष धूम के साथ बप्पा की मूर्ती को 7 से 11 दिनों तक घर में स्थापित कर रखा जाएगा। इसके पश्चात् नाचते गाते उत्सव मनाते लोग गणेश जी को विदाई उनके विसर्जन के साथ देंगे। माना जाता है कि विसर्जन के साथ बप्पा को अगले साल शीघ्र आने का न्यौता भी दिया जाता है।