कोरोना वायरस का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है लगातार कोरोना के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं, ऐसे में सरकार लोगों को इससे बचने की सलाह देती नजर आ रही है। 24 मार्च से लगे लॉकडाउन को तकरीबन 2 महीने हो चुके हैं, लेकिन कोरोना वायरस है कि खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा। और उनकी सुरक्षा में लगे कोरोना वॉरियर्स हर तरह से लोगों की मदद करते नजर आ रहे हैं।

साथ ही सरकार कोरोना का इलाज करने में अपनी तारीफों के पुल बांधती नजर आती है, चाहे वो देश के प्रधानमंत्री हो या फिर राज्य सरकारें, सरकार कोरोना के इलाज को लेकर अपनी वाह वाही करती नजर आती है, ऐसे में सवाल उठता है क्या सच में सरकार कोरोना का इलाज लोगों को दे पा रही है।

प्रधानमंत्री मोदी जी ने कई बार लोगों से कोरोना वॉरियर्स को सम्मान देने की बात की है, दिन- रात धूप और परेशानी में रहकर कोरोना वॉरियर्स लोगों की सुरक्षा में लगे हुए हैं, लेकिन सरकार कोरोना वॉरियर्स को ही कोरोना का इलाज देने में नाकाम दिख रही है। तो क्या आम आदमी को कोरोना का सही इलाज मिलेगा क्या इसकी कल्पना कर सकते हैं।

हाल ही में एक विडियो सामने आया जिसमें एक पुलिसकर्मी को कोरोना इलाज के लिए इधर -उधर भटकना पड़ रहा था, पुलिसकर्मी अपने घरों से दूर रहकर गर्मी बारिश की परवाह किये बगैर लोगों की सुरक्षा में दिन रात लगे हुए हैं, लेकिन जब वो ही कोरोना पॉजिटिव हो और उनको सही इलाज ना मिले तो क्या हम सोच सकते हैं कि आम आदमी को इलाज मिल पायेगा, और ये सब देखकर सरकार कितनी सुविधायें लोगों को दे रही है ये सोचने पर मजबूर होना पड़ेगा, क्योंकि सिर्फ खाना बांटने और सोशल डिस्टेंसिंग करने से कोरोना को देश से नहीं भगाया जा सकता ।

लेकिन अहम सवाल ये है कि जब कोरोना वॉरियर्स को ही इलाज समय पर और सही ढंग से नहींं मिल पा रहा तो क्या हम उम्मीद कर सकते हैं आम इंसान को कोरोना से बचाया जा सकेगा। थोड़े दिन ऐसा ही एक मामला सामने आया जिसमें दिल्ली पुलिस कांस्टेबल की मौत सही समय पर कोरोना का इलाज ना मिल पाने के कारण हो गई।
और फिर से एक बार ऐसा ही एक विडियो सामने आया है जिसमें पुलिसकर्मी को कोरोना के ईलाज के लिए इधर- उधर भटकना पड़ रहा है, तो ऐसे में सवाल उठता है कि सरकार के द्वारा दी गयी सुविधायें आखिर कहां है, लोगों परेशानियों का क्यों सामना करना पड़ रहा है, बात करें दिल्ली कांस्टेबल अमित कुमार की तो अस्पताल में सुविधाओं की कमी को बताते हुए अमित कुमार को भर्ती नहीं किया गया जिसके चलते कांस्टेबल अमित कुमार को अपनी जान से हाथ गवाना पड़ा।

जब कोराना वॉरियर्स का ही इलाज करने के लिए अस्पतालों में सुविधाओं की कमी है, उन्हें सही से इलाज नहीं मिल पा रहा, तो क्या आम जनता को ठीक तरह से कोरोना का इलाज मिल सकेगा,क्या सिर्फ ताली और थाली बजाकर सम्मान देना जरुरी है या फिर सही समय और सही तरीके से कोराना का इलाज करना जरुरी है, इस बात पर विचार करने की सख़्त जरुरत है, और कितने ऐसे केस देखने के बाद सरकार की नींद नहीं खुलेगी,अस्पतालों में कब सुविधायें मुहिया करायी जायेंगी, ऐसी घटनायें सरकार और अस्पताल की लापरवाही पर कई बड़े सवाल उठाती हैं। और साथ ही सरकारों के इंतजामों में कमी को उजागर करती हैं।