डिप्रेशन के जाल से अपनों को बाहर निकालें

Depression | MS Trust

आज मैंने एक दिन में दो खबरें सुनी जो कि डिप्रेशन से जुड़ी हुई थीं, सोचा क्यों कुछ इस पर लिखूं,  आजकल हमें ऐसी खबरें अपने आसपास सुनने को मिल रहीं है, जिन्हें सुनकर अच्छा नहीं लगता, जैसा कि हम सभी जानते हैं कि कोरोना ने कई लोगों की जिंदगियों को प्रभावित किया है, और इसके चलते कई लोगों ने अपनी जिंदगी में ऐसे कदम उठायें जो सही नहीं है। आजकल लगातार  हमें सुसाइड के केस सुनने को मिल रहे हैं, और इसकी वजह डिप्रेशन बताई जा रही है।

आखिर डिप्रेशन क्यों होता है, या फिर जो इंसान डिप्रेशन का शिकार होता है उसके मन की दशा क्या होती है, कभी इस तरफ हमनें ध्यान ही नहीं दिया।  आज  भोजपुरी अभिनेत्री अनुपमा पाठक ने सुसाइड़ कर ली और उन्होंने अपने आखिरी पोस्ट में लिखा कि कोई भी यहां किसी की मदद नहीं करता सब कहते हैं कि हमें बताते हम मदद करते लेकिन सच यही है जिंदा होने पर कोई किसी की मदद नहीं करता। उनकी इस  पोस्ट में दर्द साफ दिखाई देता है।

लेकिन मैं ये कहना चाहती हूं कि आखिर क्यों हम अपने आस-पास एक ऐसा जाल बुनते जा रहे हैं जिसमें कभी हम या तो हमारे अपने फंस जाते हैं, आखिर क्यों हम मरने के बाद किसी का दुख, किसी की तकलीफ को समझते हैं, आखिर क्यों हमें अपनी ही परेशानी बड़ी लगती है,  जिसके सामने हमें अपने आस-पास और अपनों की परेशानी छोटी लगती है। और जब वो सुसाइड़ जैसा रास्ता चुन लेता है तब उसकी परेशानी बड़ी और वो भी परेशान था ये समझ आता है।

क्यों हम किसी के जाने के बाद ही उसकी अच्छाइयों को गिनते हैं, ऐसे बहुत सारे सवाल हैं जिनको हमें सोचने की जरुरत है। परिवार और रिश्तों का असली मतलब ही ये है कि आपको समझें , और जब  आप परेशान हो तो उससे निकालें, जो शायद हम भूलते ही जा रहे हैं।

आजकल लोग सोशल मीडिया  के प्लेटफार्म को ही अपनी दुनिया मान बैठे हैं, आसपास क्या चल रहा है, आपके  किस अपने को आपकी जरुरत है आपको पता ही नहीं लगता, इसमें आपके दोस्त, आपका परिवार, आपके बच्चे सभी शामिल हैं।

मैं ये नहीं कह रही कि हमें सोशल मीडिया से या आज कि तकनीकों से खुद को दूर कर लेना चाहिए, मेरे कहने का मतलब है कि हमेंं इन सब के साथ अपनी आखों और कानों को भी खोलने की जरुरत है, जो कि अपनों की जान बचाने और उनको तकलीफ सा बाहर निकालने के लिए जरुरी है।

हम घंटों फेसबुक इंस्टाग्राम पर वीडियोज और फोटोज को देखने में निकाल देते हैं , जिनसे हमारा कोई रिश्ता नहीं जिनसे हम कभी मिले नहीं, लेकिन हम कई नामी चेहरों की वीडियोज देखकर उनके लाइकस बढ़ाते हैं,  तो आपको बताना चाहूंगी कि वो तो अपना काम कर रहे हैं, क्या कभी सोचा है कि क्या आप अपना काम कर रहे हैं?

जी हां क्या आप अपना काम कर रहे  हैं?  सोचिये क्या आप अपने घर में अपने आसपास देख रहे हैं जिसने कभी आपसे अपनी परेशानी  शेयर की हो और आपने उसे उस परेशानी से निकालने का काम किया है। हम अक्सर यही करते हैं, किसी के जाने के बाद उसकी अच्छाइयों को याद करते हैं, और कहते हैं कि काश उसने बताया होता तो हम मदद करते। लेकिन उसने तो बताया था लेकिन आपने सुना नहीं आपने समझा नहीं।

छोटे परिवार आजकल सबको अच्छे लगते हैं लेकिन इसका असर हमें देखने को मिल रहा है, अवसाद, अकेलापन,  घटों सोशल मीडिया पर लगे रहना और साथ में जो है उसका हाल ना पूछना ये कितना सही है।  हमें इन सब बातों पर सोचने की जरुरत है,  ऐसा ना हो कि ये सोशल  मीडिया का जाल , अकेलेपन का एहसास, अपनों के पास बैठकर उनके बारे में ना जानने की आदत हमें पछतावा  दे। इसलिए अपनों  का हाल जरुर लें, हो सकता है उनको आपकी जरुरत हो सकता है कहीं ना कहीं आपको भी उऩकी जरुरत हो, आज भी कुछ नहीं बदला है आज भी हम एक साथ मिलकर टीवी देख सकते हैं, गेम खेल सकते हैं, आउटिंग पर जा सकते हैं , कहानियां सुन सकते हैं , एक दूसरे से अपने दिल की बात कह सकते हैं।

जररुत है तो थोड़े से बदलाव कि और ऐसा करके हम अपनों के और करीब आ सकते हैं और उन्हें डिप्रेशन जैसे जाल में उलझने से बचा सकते है।  अपने- अपने कमरों में जाकर फोन इस्तेमाल करने कि बजाय एक दूसरे का कुछ देर हाल जरुर पूछें। और अकेलेपन से बाहर निकालें ताकि इस जाल में कभी ना आप फसें  ना आपके अपने।

आजकल देखने को मिल रहा है कि लोग डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं और अकेलेपन और घबराहट में सुसाइड़ जैसा कदम उठा रहे हैं। याद रखिये जीवन में ऐसी कोई भी समस्या नहीं जिसका हल नहीं, और अगर आप जीवन में असफल होते भी हैं तो ये याद रखिये कि आपने प्रयास किया सफलता नहीं मिली तो क्या हुआ,  क्योंकि आपका एक गलत कदम आपके परिवार को इतना दुख देता है जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते, क्योंकि आप तो चले जाते हैं लेकिन आपकी यादें रह जाती हैं जो जीनें नहीं देतीं।  तो ऐसा कोई भी कदम ना उठायें और थोड़े से बदलाव से अपने जीवन को खुशहाल बनायें, जो है आपके पास वो बहुत है, जहां आप हैं वो काफी है, और इसी पॉजिटिव सोच के साथ आगे बढ़े।   आपको ये लेख कैसा लगा आप कॉमेंट करके बता सकते हैं ।

 

5 Comments

  1. आपने आज के हिसाब से बिल्कुल सही तथ्य निकाले हैं डिप्रेसन से दूर रहने के

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