कोरोना महामारी के इलाज पर होने वाले खर्च को वहन करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार ने अपने ऊपर रखने के बदले कलेक्टरों पर डाल दी है। दानदाताओं, कंपनियों, संस्थाओं से फंड जुटाने और व्यवस्था करने के लिए सभी जिलों में सीएसआर कोष गठित करने का आदेश दिया है। कोरोना महामारी से राज्य सरकार पर अतिरिक्त बोझ आ गया है। दूसरी लहर में ऑक्सीजन और रेमडेसिविर इंजेक्शन, वेंटिलेटर समेत सभी महत्वपूर्ण उपकरणों और दवाओं की कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने भारी-भरकम खर्च किया है।
तीसरी लहर से निपटने की तैयारी के लिए वेंटिलेटर, बेड, दवा और ऑक्सीजन प्लांट लगाने की व्यवस्था की जा रही है। सूत्रों की मानें तो सरकार अब तक कोरोना के पीछे 2500 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। अब दाताओं से रकम जुटाने की जिम्मेदारी कलेक्टरों को सौंपी गई है।
उद्याेग विभाग द्वारा पारित प्रस्ताव के अनुसार कोरोना महामारी, प्राकृतिक आपदा से उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए एक सीएसआर कोष का गठन किया गया है और कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति बनाई गई है। कलेक्टरों को एक अलग सीएसआर कोष गठित करने की मंजूरी दी गई है। इसके लिए बैंक में अलग से अकाउंट खोलकर व्यवस्था करने की मंजूरी दी गई है। जिला ई-सेवा सोसाइटी को सीएसआर की कार्यवाही करने के लिए रजिस्ट्रेशन कराना होगा।