भारत में योग का महत्व प्राचीन समय से ही रहा है। प्राचीन भारत के लोगों का जीवन जितना सीधा व सरल होता था उतना ही वे प्रकृति के करीब थे। आज वर्तमान की बात करें तो लोगों ने योग के महत्व को केवल जाना ही नहीं अपितु साथ-साथ इसे अपनाया भी है। योग हमारे शरीर में कई बीमारियों के रोगाणुओं के प्रवेश को रोकता है।वतर्मान काल की भाग-दौड़ की जिंदगी में व्यक्ति की जिंदगी भी छोटी होती जा रही है। समय के साथ व्यक्ति की कार्यों में व्यसतता निश्चित ही बढ़ी है, लेकिन इस व्यसतता के कारण कहीं ना कहीं हम अपनी शाररिक आवश्यकता को भी भूलाते जा रहे हैं। इस तथ्य से आप भली-भांति परिचित होंगे कि प्राचीन समय में व्यक्ति की उम्र 95-96 वर्ष के आसपास हुआ करती थी। यह निश्चित ही उनके स्वस्थ जीवन का एक संकेत हमें नज़र आता है। समय के साथ व्यक्ति के रहन-सहन में परिवर्तन आया है।
इस बदलते समय में व्यक्ति का जितना विकास हुआ है उतना ही अधिक उसे नई-नई बीमारियों ने घेरा है। हार्ट फेल होना, फेफड़ों या साँस से जुड़ी बीमारियाँ लगातार व्यक्ति को इस वर्तमान युग में घेर रही है।
बदलते समय के समय व्यक्ति को तनाव ने घेरा है। दिन-प्रतिदिन की प्रगति से व्यक्ति का विकास तो हो रहा है पर इसके विपरीत व्यक्ति अधिक तनावग्रस्त होकर अपनी जिंदगी के कुछ सालों को कम भी कर रहा है। योग ना केवल हमें शारिरिक रूप से स्वस्थ रखता है बल्कि इसका उतना ही महत्व व्यक्ति के मानसिक दबावों को कम करने में भी है।

विकास की यह दौड़ इतनी तीव्र है कि व्यक्ति के योग को समय ना देने का कारण अक्सर समय की कमी को ही बता दिया जाता है। देर रात तक कम्प्यूटर, लैपटॉप पर बैठ कर काम करना सुबह देरी से उठना जैसी आदतें हमें दिन-प्रतिदिन बीमार ही करती जा रही हैं।
यदि हम योग के महत्व को समझते हुए थोड़ा समय योग, एक्सरसाइज या मॉरनिंग वॉक को देते हैं तो इसके निश्चित ही हमें लाभदायी परिणाम मिलेंगे।
केवल भारत देश ही नहीं विश्व के अधिकतर देशों ने योग के महत्व को जाना है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस विश्व भर में हर साल 21 जून को मनाया जाता है। कुछ समय पूर्व लोगों में योग की महत्ता का ज्ञान इतना नहीं था जितना कि पिछले कुछ वर्षों से होने लगा है। यहाँ तक कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी योग के महत्व को मानते हुए लोगों को योग करने की सलाह देते रहते हैं। वह खुद भी योग दिवस के दिन जनता के साथ योग करते नज़र आते हैं।
वर्तमान की इस विकास दौड़ में हम कहीं शारिरिक रूप से कमजोर ना पड़ जायें इसके लिए बेहद आवश्यक है कि हम थोड़ा समय योग को दें अन्यथा इसके परिणाम घातक बीमारियों का शरीर में प्रवेश मात्र ही रह जाएगा।