
आज से नवरात्रों की शुरुआत हो चुकी है, पहले नवरात्रे पर मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इस दिन हवन और पूजा करने के बाद मां शैलपुत्री से जुड़ी कथा भी सुननी चाहिये, ताकि आपकी पूजा का पूरा फल आपको मिल सके। और आपका जीवन भी खुशियों से भर जाये।
मां शैलपुत्री की पूजा सामग्री
एक छोटी चुनरी, एक बड़ी चुनरी, कलावा, चौकी, कलश, कुमकुम, पान, सुपारी, कपूर, जौ, नारियल, लौंग
बताशे, आम के पत्ते, केले का फल, देसी घी, धूप, दीपक, अगरबत्ती, माचिस
मिट्टी का बर्तन, माता का श्रृंगार का सामान, देवी की प्रतिमा या फोटो, फूलों की माला
गोबर का उपला, सूखे मेवा, मावे की मिठाई, लाल फूल, एक कटोरी गंगाजल और दुर्गा सप्तशती या दुर्गा स्तुति आदि का पाठ जरूर करें।
मां शैलपुत्री कथा
मां शैलपुत्री को सती के नाम से भी जाना जाता है एक बार प्रजापति दक्ष ने यज्ञ रखा, इस यज्ञ में सभी देवी देवताओं को निमंत्रण भेजा गया, लेकिन भगवान शिव को निमंत्रण नहीं भेजा। देवी सती को उम्मीद थी कि उनके पास भी निमंत्रण जरूर आएगा लेकिन निमंत्रण ना आने पर वो दुखी हो गईं, और वो अपने पिता के यज्ञ में जाना चाहती थीं लेकिन भगवान शिव ने उन्हें इंनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि जब कोई निमंत्रण नहीं आया है तो वहां जाना उचित नहीं होगा, लेकिन जब सती ने बार-बार आग्रह किया तो शिव को भी अनुमति देनी पड़ी, प्रजापति दक्ष के यज्ञ में पहुंचकर सती को अपमान महसूस हुआ। उनकी बहने उपहास उड़ा रही थीं और भोलेनाथ को भी तिरस्कृत कर रही थीं, खुद प्रजापति दक्ष भी मां सती का अपमान कर रहे थे। इस अपमान को मां सती सहन नहीं कर पायीं और वो अग्नि में कूद गई और अपने प्राण त्याग दिए।
भगवान शिव को जब इस बात का पता चला तो वो क्रोधित हो गए और उन्होंने पूरे यज्ञ को ध्वस्त कर दिया, उसके बाद सती ने हिमालय के यहां पार्वती के रूप में जन्म लिया। मां शैलपुत्री का वास काशी नगरी वाराणसी में वास माना जाता है।