वर्षों से अटके राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद भूमि के विवादित मामले पर ऐतिहासिक फैसला सुप्रीम कोर्ट की ओर से आ गया है। दो धर्मों के बीच विवादित रही भूमि पर आज सुबह साढ़े दस बजे चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में फैसला सुना दिया गया है।

विवादित भूमि पर मुस्लिम पक्ष के पक्के दावे ना पेश होने के कारण हिंदुओं को यह जम़ीन सौंप दी गयी है। इससे पहले बताते चलें कि यह विवादित भूमि तीन पक्षों में बांटने का फैसला सुनाया गया था। हाइकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी थी।
Varun Kumar Sinha, Lawyer of Hindu Mahasabha: It is a historic judgement. With this judgement, the Supreme Court has given the message of unity in diversity. pic.twitter.com/pJW3jJDmx7
— ANI (@ANI) November 9, 2019
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले में यह विवादित जमीन अब रामलला विराजमान को सौंप दी गयी है।
#WATCH "It is a historic and landmark judgement," says Defence Minister Rajnath Singh on #AyodhyaJudgment pic.twitter.com/0hKNBV79Co
— ANI (@ANI) November 9, 2019
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को मंदिर बनाने हेतु ट्रस्ट का निर्माण का आदेश दिया है। इस ट्रस्ट को बनाने के लिए केंद्र सरकार को 3-4 महीने का समय दिया गया है। फिलहाल के लिए यह जमीन केंद्र सरकार के जिम्मे रहेगी।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम धर्म का सम्मान करते हुए अयोध्या के प्रमुख स्थान पर 5 एकड़ की जमीन दी जाएगी। उत्तर प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन वैकल्पिक जमीन दी जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों वाली बेंच ने माना कि अयोध्या की विवादित भूमि राम जन्मभूमि ही रही है। हिंदू हमेशा से मानते रहे हैं कि मस्ज़िद का भीतरी हिस्सा ही भगवान राम की जन्मभूमि है। यह साबित भी हुआ है कि मुस्लिम ढ़ांचे के भीतर मुस्लिम इबादत करते थे जबकि हिंदू उसके बाहर पूजा करते थे।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि राजस्व रिकार्ड के अनुसार विवादित भूमि सरकारी है। ASI के निष्कर्षों को भी नज़रअंदाज करना सही ना माना। गौरतलब है कि विवादित भूमि को पुख्ता सबूतों हेतू खोदने का काम हाईकोर्ट द्वारा ASI को सौंपा गया था। ASI के निष्कर्षों से यह साबित हुआ था कि जमीन के नीचे का ढांचा इस्लामिक नहीं था।

नष्ट किये गए ढांचे के नीचे मंदिर था। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इस बात के सबूत हैं कि राम चबूतरा, सीता रसोई की पूजा हिंदुओं द्वारा अंग्रेजों के आने से पहले से ही की जाती थी।

आस्था को व्यक्तिगत मामला मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हिंदुओं की आस्था का सम्मान किया। साढ़े 10 बजे देश के दो धर्मों से जुड़े इस विवादित मामले पर ऐतिहासिक फैसला सुनाने से पूर्व चीफ जस्टिस ने लोगों से शांति बनाए रखने की विशेष अपील की।

वहीं देश के इस विवादित मामले सुरक्षा के लिहाज से राज्य में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। उत्तरप्रदेश सरकार सुरक्षा के लिहाज से राज्य में सभी स्कूलों को 9 से 11 नवंबर तक बंद करने के आदेश दे दिए हैं।

वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासन के अफसरों को सोशल मीडिया पर नजर रखने के कड़े आदेश भी दे दिये हैं। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के इस फैसले को अनेकता में एकता के उद्देश्य से सम्मानित किया जा रहा है।