आजादी के अमृत महोत्सव पर सोनाली रॉय ने कथक नृत्य से दर्शकों का मन मोहा

नई दिल्ली। आजादी के अमृत महोत्सव के मौके पर भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और संगीत नाटक अकादमी द्वारा नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित कथक केंद्र में चंपारण सत्याग्रह दिवस के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर पंडित बिरजू महाराज की शिष्या सोनाली रॉय ने अपनी कथक नृत्य से दर्शकों का मन मोह लिया। सोनाली ने अपनी प्रस्तुति की आरंभ पंडित बिरजू महाराज जी द्वारा लिखित कृष्ण पद ‘श्री कृष्ण नृतक’ से किया। जिसमें वृंदावन में प्राकृतिक सौंदर्य के सभी सौंदर्य संबंधित प्रवृत्तियों को परिलक्षित कर श्री कृष्ण जी का एक ललित रूप चित्रण किया गया, जो वृंदावन की आभामंडल में नृत्य कर रहे हैं। उसके उपरांत वह कत्थक की नृत्य पक्ष में ताल तीनताल विलंबित में उठान, थाट, आमद , चक्कर के बोल आदि तत्पश्चात ताल धमाल 14मात्रा में बंदीसे प्रस्तुत किया। इसके साथ ही वह भाव पक्ष में एक ठुमरी “ए री सखी का से कहूं कान्हा की चतुराई”पेश किए। अंत में ध्रुत लय तीन ताल में से अपनी नृत्य का समापन किया। इस मौके पर उनके साथ संगत कलाकार-  तबला पर – श्री उत्पल घोषाल, गायन – जय दाधीच, सरेंगी – गुलाम वारिस जी, पढ़ंत – शैंकी सिंह।कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक तरिके से दीप प्रजज्वलित कर किया गाया। इस मौके पर कथक केंद्र के डायरेक्टर सुमन कुमार भी मौजूद रहे।

सोनाली रॉय नृत्य शिरोमणि से अलंकृत पद्म विभूषण पंडित बिरजू महाराज जी की शागिर्द हैं. उन्हें अमृता शेर – गिल कल्चरल सेंटर, एम्बेसी ऑफ इंडिया, बुडापेस्ट (हंगरी) में कथक डांस टीचर कम परफॉर्मर के रूप में 2018 में ICCR और विदेश मंत्रालय द्वारा प्रतिनियुक्त किया गया। उन्होंने 8साल की उम्र में श्री अशीम कुमार सरकार के तहत कामाख्यागुड़ी (पश्चिम बंगाल) में कथक नृत्य की शिक्षा लेना प्रारंभ किया। बाद में उन्हें कोलकाता में प्रसिद्ध गुरु श्री संतोस कुमार चटर्जी के तहत प्रशिक्षण मिला उन्होंने रविन्द्र भारती विश्वविद्यालय, कोलकाता 2004में अपने कथक नृत्य में परास्नातक पूरा किया।