
कलाकार:रणबीर कपूर,आलिया भट्ट,अमिताभ बच्चन,नागार्जुन,शाहरुख खान,मौनी रॉय
डायरेक्टर : अयान मुखर्जी
अवधि: 2 Hrs 46 Min
रेटिंग : 3.5
उत्सवों के रंग, परंपराओं के संग:
‘ब्रह्मास्त्र: पार्ट वन शिवा’ एक तरह से देखा जाए तो सनानत संस्कृतियों और परंपराओं से भागती युवा पीढ़ी को वापस उनकी धुरी की तरफ लाने की अच्छी कोशिश है। आमतौर पर जब फिल्मों में पैर छूने की प्रक्रिया घुटनों से नीचे खिसकने में हांफ जाती है, यहां कहानी का नायक कम से कम दो बार अपने वरिष्ठों के चरण बाकायदा पैर के अंगूठों तक जाकर छूता है। फिल्म की उत्सवधर्मिता का अपना एक अलग रंग है। दशहरा से दीवाली के बीच के रंगों, प्रकाशों और उत्साहों की झलक फिल्म में दिखती है।

कहानी:
फिल्म की कहानी ऋषि-मुनियों को वरदान के रूप में मिले अस्त्रों के देवता ब्रह्मास्त्र की है, जिसकी रक्षा उसके रक्षकों यानी ब्रह्मांश की जिम्मेदारी है। इस ब्रह्मास्त्र के तीन टुकड़े हैं, जो ब्रह्मांश के अलग-अलग सदस्यों के पास सुरक्षित हैं। ब्रह्मांश के इन सदस्यों में वैज्ञानिक मोहन भार्गव (शाहरुख खान), कलाकार अनीश (नागार्जुन) से लेकर मस्तमौला डीजे शिवा (रणबीर कपूर) तक शामिल है। ब्रह्मास्त्र का ये पहला भाग शिवा के सफर पर आधारित है, जिसे इस जर्नी में प्यार ईशा (आलिया भट्ट) और गुरु जी (अमिताभ बच्चन) के जरिए अपनी ताकत का अंदाजा होता है। दूसरी ओर, अंधेरे के देवता को मानने वाली जुनून (मौनी रॉय) ब्रह्मास्त्र के तीनों टुकड़ों को किसी भी कीमत पर हासिल करना चाहती है। अब जुनून अपने मकसद में कामयाब हो पाती है या शिवा अपनी ताकत से उसे रोक लेता है ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

एक्टिंग:
फिल्म में रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की जोड़ी अच्छी लगी हैं, दोनों ने अपने किरदार को बेहतरीन तरीके से निभाया है। वहीं फिल्म में अमिताभ बच्चन का कूल लुक दिखाया है जो की काफी अच्छा लगा है। वहीं साउथ सुपरस्टार नागार्जुन भी अच्छे लगे हैं। इसके अलावा मौनी रॉय विलेन के रोल में आर्यान मुखर्जी की पसंद रही हैं। अमिताभ और रणबीर के आगे भी वो मजबूती से टिकी हैं।इसके अलावा फिल्म की शुरुआत में शाहरुख खान की झलक भी फिल्म को पकड़े रखने का काम करती है। काफी समय बाद एक फिल्म में कई बॉलीवुड़ के चेहरे देखने को मिले, डिंपल कपाडिया, अमिताभ बच्चन, आदि जैसा कि अक्सर 90 के दशक में देकने को मिलते थे। फिल्म ग्रैंड है इसमें कोई शक नहीं है, फिल्म में कुछ नया करने की कोशिश की गई है और इसके लिए अयान मुखर्जी की तारीफ होनी चाहिए क्योंकि हम अक्सर कहते हैं कि बॉलीवुड वाले कुछ नया क्यों नहीं करते, इस फिल्म के जरिए कुछ नया करने की कोशिश की गई है।
क्यों देखें:
अयान मुखर्जी ने बॉलीवुड़ में कुछ अलग बनाने का प्रयास किया है, जो कि अक्सर हमें हॉलीवुड़ की फिल्मों में देखने को मिलता था,इसलिए ये फिल्म अयान मुखर्जी का कुछ अलग करने की कोशिश हा ये कहना गलत नहीं होगा। पर्दे पर एक शानदार विजुअल का अनुभव महसूस करना चाहते हैं, तो आप इस फिल्म को देख सकते हैं, साथ ही ये फिल्म ग्राफिक्स की वजह से बच्चों को काफी पसंद आ सकती है, और वीएफएक्स के शौकीनों को भा सकती है। और साथ ही आप रणबीर आलिया और अमिताभ के फैन हैं तो इस फिल्म को देख सकते हैं।