
धार्मिक मान्यताओं के मानें तो एकादशी का व्रत बेहद ही महत्वपूर्ण माना जाता है। कहा जाता है कि इस व्रत को रखने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है. प्रत्येक माह दो एकादशी के व्रत आते हैं और प्रत्येक एकादशी अपने आप में बेहद ख़ास होती है। कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहा जाता है, आइए जानते हैं कि इस बार वरुथिनी एकादशी का व्रत कब रखा जायेगा। साथ ही जानते हैं, शुभ मुहूर्त और इसका महत्व।
वरुथिनी एकादशी व्रत:
पंचांग के मुताबिक इस बार 15 अप्रैल को रात आठ बजकर 45 मिनट पर शुरू होगी जो कि 16 अप्रैल को शाम छह बजकर चौदह मिनट पर समाप्त होगी, यानि उदयातिथि के मुताबिक अ वरुथिनी एकादशी का व्रत 16 अप्रैल, रविवार के दिन रखा जाएगा।
वरुथिनी एकादशी का शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त सुबह सात बजकर 32 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 45 मिनट तक है, बता दें कि एकादशी का व्रत करने के बाद अगले दिन व्रत का पारण किया जाता है. वरुथिनी एकादशी का व्रत पारण 17 अप्रैल को किया जायेगा। सुबह पांच बजकर 54 मिनट से लेकर सुबह आठ बजकर 29 मिनट तक व्रत पारण का समय रहेगा।
जानें वरुथिनी एकादशी का महत्व:
धार्मिक पुराणों के मुताबिक वरुथिनी एकादशी का व्रत रखने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है, वरुथिनी एकादशी के व्रत को कन्यादान के पुण्य के बराबर माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है