हैरानी सी लगती है, जब मेरी बीबी मुझ पर
सिर्फ़ अपने ही हक़ की बात करती है
पराये हैं वो ये कहकर
मेरे साथ खेले भाई- बहन की बात करती है।।
दिन रात मुझे परेशान करती है
कभी कुछ मांगती है, तो कभी कुछ कहती है
हर शाम मेरे घर आने पर मेरी मां की शिकायत मुझसे करती है।।
सात फेरों को हर बार याद दिलाती है
सिर्फ़ यही रिश्ता अच्छा और सच्चा है अक्सर समझाती है
अपने ही सगे सबंधियों और खून के रिश्तों से बेगाना करती है
हैरानी सी लगती है, जब मेरी बीबी मुझ पर
सिर्फ़ अपने ही हक़ की बात करती है।।
भाई-बहन घर आयें तो कब जायेंगे यही याद रखती है
दिन में चार बार मुझसे पूछती है, यही बात करती है
अपने भाई- बहनों को जिंदगी भर, साथ रखने की बात करती है।।
अपने घर जानें पर बदल गए हैं सब, ये बात मुझसे आकर कहती है
भूल जाती है वो अक्सर, वो भी तो मुझसे बदलने की बात करती है
सात फेरोंं में ही, सिमट कर रह जाता है रिश्ता
ना जानें क्यों मेरी बीबी, सिर्फ़ अपने ही हक़ की बात करती है।।
Writer- Kalpana Chauhan