हम से दूर कैसे रह पाओगे
हमारी मोहब्बत को कैसे भूलाओगे
यूं तो मिलेगें ना जानें कितने ही हमसफर
लेकिन हमारे जैसा हमसफर कहां से लाओगे।।
‘दुनिया में ना जानें कितने मैखाने हैं मोहब्बत के’
लेकिन हर मैखाने में हमारी जैसी बात कहां से लाओगे।।
‘मिलने को तो मिलते हैं हजारों शख़्स इस जहांन में
हर शख़्स में हम जैसी बात कहां से लाओगे
हमारी जैसी अदा, हमारी जैसी बफ़ा कहां ले लाओगे ।।
हम से दूर कैसे रह पाओगे
हमारी मोहब्बत को कैसे भूलाओगे
यूं तो मिलेगें ना जानें कितने ही हमसफर
लेकिन हमारे जैसा हमसफर कहां से लाओगे।।
Writer- Kalpana Chauhan