प्यार तो रुह से होता है, जिस्मों से तो सिर्फ़ रिश्ता बनता है
जो समझ ले इस फर्क़ को, वो शिकायत ना करे
गलतफ़हमी के चलते, अपने रिश्ते बर्बाद ना करे
रुह का रिश्ता, पाक और सच्चा होता है
फिर कोई शामिल हो, ना हो जिंदगी में
साथ चले ना चले, क्या फर्क़ पड़ता है।।
यूं तो हर कोई लिखता है अफसाना, अपनी मोहब्बत का
कोई रुह के जरिये, जिंदगी भर का साथ लिखता है
तो कोई दो दिन के लिए, लिखता है
जो समझ ले, इन शब्दों की गहराई को
फिर उसके लिए कोई दूर हो या पास, क्या फर्क़ पड़ता है।।
Writer- Kalpana Chauhan