Love Poetry: रिश्तों का आईना
बरसों से नहीं देखा मैनें रिश्तों का आईनाये आईना टूट जाता है, ये आईना चिटक जाता हैकभी देखते ही देखते हाथों से छूट जाता है।। [Read More]
बरसों से नहीं देखा मैनें रिश्तों का आईनाये आईना टूट जाता है, ये आईना चिटक जाता हैकभी देखते ही देखते हाथों से छूट जाता है।। [Read More]
प्यार तो रुह से होता है, जिस्मों से तो सिर्फ़ रिश्ता बनता हैजो समझ ले इस फर्क़ को, वो शिकायत ना करेगलतफ़हमी के चलते, अपने [Read More]
लगता है वो मुझे भूलने लगा हैपहले की तरह मुलाक़ात की बेताबी कहांमेरे बिना रहने की शायद आदत सी हो गई है उसेबात करने की [Read More]
ख़ामोशियों में तब्दील हो जाये कोई रिश्ताउसे टूटने में देर नहीं लगतीअल्फ़ाज कम पड़ जायें गुफ्तगु करने के लिए, तो राहें बदलने में देर नहीं [Read More]
वक़्त के साथ यारी कर लीहालातों से रिश्तेदारी कर ली अब गम मेहमान बनकर आता है,थोड़ी देर हस बोलकर दरवाजे से वापस चला जाता हैपहले [Read More]
एक गुनाह हर बार कर लेता हूंहर शख़्स पर एतबार कर लेता हूंभूल जाता हूं कि हर शख़्स सच्चा और अच्छा नहीं होताफिर भी उस [Read More]
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