बरसों से नहीं देखा मैनें रिश्तों का आईना
ये आईना टूट जाता है, ये आईना चिटक जाता है
कभी देखते ही देखते हाथों से छूट जाता है।।
पहले रिश्तों के आईने की धूल साफ कर लेता था अब बरसों से घर नहीं लाया रिश्तों का आईना।।
Writer- Kalpana Chauhan
बरसों से नहीं देखा मैनें रिश्तों का आईना
ये आईना टूट जाता है, ये आईना चिटक जाता है
कभी देखते ही देखते हाथों से छूट जाता है।।
पहले रिश्तों के आईने की धूल साफ कर लेता था अब बरसों से घर नहीं लाया रिश्तों का आईना।।
Writer- Kalpana Chauhan
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