Love Poetry: रिश्तों का आईना
बरसों से नहीं देखा मैनें रिश्तों का आईनाये आईना टूट जाता है, ये आईना चिटक जाता हैकभी देखते ही देखते हाथों से छूट जाता है।। [Read More]
बरसों से नहीं देखा मैनें रिश्तों का आईनाये आईना टूट जाता है, ये आईना चिटक जाता हैकभी देखते ही देखते हाथों से छूट जाता है।। [Read More]
लगता है वो मुझे भूलने लगा हैपहले की तरह मुलाक़ात की बेताबी कहांमेरे बिना रहने की शायद आदत सी हो गई है उसेबात करने की [Read More]
ख़ामोशियों में तब्दील हो जाये कोई रिश्ताउसे टूटने में देर नहीं लगतीअल्फ़ाज कम पड़ जायें गुफ्तगु करने के लिए, तो राहें बदलने में देर नहीं [Read More]
जो सिर्फ़ सूरत से प्यार करे, वो ना जाने कितनों से प्यार करेजो सीरत से प्यार करे, वो सिर्फ़ एक चेहरे का दीदार करेसाथ हो [Read More]
एक गुनाह हर बार कर लेता हूंहर शख़्स पर एतबार कर लेता हूंभूल जाता हूं कि हर शख़्स सच्चा और अच्छा नहीं होताफिर भी उस [Read More]
यादों को कह दो कि अभी मत आओअभी हम तुम्हें डायरी में उतार रहे हैंयाद कर रहे हैं तुम्हारी सौगात देने वाले कोथोड़ी वक़्त से [Read More]
‘मुझे गुलाबी रंग अच्छा लगता है’इश्क़ तो सब करते हैंमुझे तेरा इश्क़े अंदाज़ अच्छा लगता है।।Writer- Kalpana Chauhan
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