सही -गलत का फेर

Hindi sad poetry
Hindi sad poetry

एक गुनाह हर बार कर लेता हूं
हर शख़्स पर एतबार कर लेता हूं
भूल जाता हूं कि हर शख़्स सच्चा और अच्छा नहीं होता
फिर भी उस पर विश्वास कर लेता हूं।।

कीमत वो क्या जाने शब्दों कि जिसे शब्दों का ज्ञान न हो
कीमत वो क्या जाने इंसानियत की जिसके दिल में इंसान न हो।।

कीमत वो क्या जाने रिश्तों की, जिसने रिश्ते निभाने कभी सीखे नहीं
कीमत वो क्या जाने सही -गलत की, जिसने कभी सही-गलत में फर्क़ समझा न हो।।

Writer- Kalpana Chauhan