देश के संवेदनशील मुद्दे अयोध्या-बाबरी के फैसले पर जनता की टिकेंगी नजरें आज

मोदी सरकार के कश्मीर पर ऐतिहासिक फैसले के बाद देश के एक औऱ ऐतिहासिक फैसले पर जनता की आज नज़र रहेगी। देश में आज वर्षों से चल रहे अयोध्या राम मंदिर-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद के मसले पर आज सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई की जाएगी।

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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में आज अयोध्या राम मंदिर मामले पर फैसला लिया जाएगा। हालांकि इस मामले पर मध्यस्था के लिए बनाई गयी बेंच अपना कोई निर्णय नहीं ले पाई थी। इसके पश्चात् मामले में सुनवाई के फैसले पर देश की जनता की नज़र रहेगी।

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सालों से लंबा खींच रहे इस मामले पर कई बार सुनवाई टाल कर अगली तारीख के लिए लटका दी जाती हैं। हिंदु-मुस्लिम के दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद भी हर बार सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाता।

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ताज़ा खबरों में बात आ रही है कि सुप्रीम कोर्ट आज से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्ज़िद भूमि विवाद पर मंगलवार यानि आज से रोज सुनवाई करेगा।

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रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच सदस्यों की संविधान पीठ मामले पर सुनवाई करेगा। हालांकि इस मामले पर जब मध्यस्था की एक बेंच तैयार की गयी तो आशा की एक किरण भी बंध गयी थी, कि जल्द ही इस मसले का कोई हल निकलेगा। लेकिन यह निराशाजनक रहा कि चार महीने तक चली मध्यस्था पीठ की प्रक्रिया का अंततः कोई परिणाम ही नहीं निकला।

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कश्मीर के मुद्दे पर सरकार के बड़े फैसले के बाद जनता की नज़र अब मुख्य रूप से अयोध्या मामले पर ही टिकी हैं। सावन के तीसरे सोमवार पर मोदी सरकार का कश्मीर से विशेषाधिकार खत्म करने से मोदी सरकार पर जनता की विश्वास की नींव और मज़बूत हो चली है। कश्मीर का मामला भी 20 साल पुराना था। जो संवेदनशील होते हुए कश्मीर के स्थानीय लोगों की भावनाओं से जुड़ा था।

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इस संवदनशील मुद्दे पर सरकार का ऐतिहासिक फैसला आखिरकार मोदी सरकार के नेतृत्व में जमीनी हकीकत का रूप दे ही दिया गया। वहीं अयोध्या मामला भी दो धर्मों की भावनाओं से जुड़ा मामला है जिस पर जल्द से जल्द फैसला लेना भी संभव नहीं। सोशल मीडिया पर मोदी सरकार के ऐतिहासिक फैसले के बाद देश की जनता ने अयोध्या मामले पर भी कोई ठोस फैसला लेने की अपील की है।

बता दें, राम मंदिर-बाबरी मस्ज़िद के इस संवेदनशील मामले पर साल 2010 में राज्य के इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला लिया था। अपने इस फैसले में कोर्ट ने जमीन को तीन हिस्सों में बांट दो-तिहाई हिस्सा हिंदुओं औऱ एक-तिहाई हिस्सा मुस्लिम समुदाय के सुन्नी वक्फबोर्ड को सौंप दिया गया था। लेकिन हाई कोर्ट के इस फैसले पर दोनों पक्षों की कोई स्वीकृति ना बन पाई। उसके बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ते हुए आज सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर आ खड़ी हुई है।

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बीते शुक्रवार यानि 2 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने बताया था कि उनका मध्यस्थता पैनल कोई निर्णय नहीं ले पाया। यह तीन सदस्यों की बेंच थी जो कि शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश एफ.एम. आई कलीफुल्ला की अध्यक्षता में कार्य कर रही थी।

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