भारत की जननी का गौरव प्राप्त सुषमा स्वराज देश से अलविदा कह गयीं। बीते मंगलवार रात 9 बजे दिल का दौरा पड़ने से देश की इस गौरवशाली नेता का देहांत हो गया। इसी के साथ देशभर में सुषमा स्वराज के लिए आँखें नम हैं।

6 अगस्त को देश की जननी का अंतिम दिन था। बीजेपी की वरिष्ठ नेता जाते-जाते भी देश की जनता के लिए अपने बहुमूल्य शब्द ट्वीट कर गयीं। अभी बीते सोमवार को मोदी सरकार का एक बड़ा ऐतिहासिक फैसला कश्मीर राज्य के लिए आया था। जिसके लिए सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर अपनी खुशी जाते-जाते ज़ाहिर कर गयीं।

रात 9 बजे सुषमा स्वराज का दिल का दौरा पड़ा, वहीं ठीक 1 घंटे पहले स्वराज ने देश के लिए अपनी खुशी ज़ाहिर की। स्वराज लिखती हैः “प्रधान मंत्री जी-आपका हार्दिक अभिनंनद है, मैं अपने जीवन में इस दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी”।
प्रधान मंत्री जी – आपका हार्दिक अभिनन्दन. मैं अपने जीवन में इस दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी. @narendramodi ji – Thank you Prime Minister. Thank you very much. I was waiting to see this day in my lifetime.
— Sushma Swaraj (@SushmaSwaraj) August 6, 2019
यह सुनने और देखने में रोचक ही लगता है कि देश की यह प्रखर नेता जो कि नागरिकों की परेशानियों में उनके साथ हमेशा डटी रहीं, की अंतिम इच्छा भी देश हित में ही थी।

सुषमा स्वराज अपने हर भाषणों में कश्मीर से विशेषाधिकार खत्म करने की बात ज़ज्बे से करती रही थीं। और अंततः देश को सदैव देने वाली इस जननी की अंतिम इच्छा भी पूरी हुई।

सुषमा स्वराज का पार्थिव शरीर उनके निवास स्थान पर लाया जा चुका है। स्वराज के अंतिम दर्शन के लिए देशभर से उनके चाहने वालों को तांता लगा हुआ है।

सुषमा स्वराज अपने पूरे जीवन में एक गौरवशाली राजनेता के किरदार में 6 बार सांसद, 3 बार विधायक और 4 बार केंद्रीय मंत्री रहीं। पूर्व केंद्रीय विदेश मंत्री के पद पर रहते हुए स्वराज के देशहितकारी निर्णयों से सदा ही उन्हें सराहा गया।

देश ही नहीं विदेशों में भी सुषमा स्वराज के कार्यों के चर्चे किये जाते थे। यह कहने की जरूरत नहीं कि बीजेपी की वरिष्ठ नेता स्वराज पाकिस्तान जैसे देश में फँसे भारतीयों को स्वदेश लौटाने में महत्वपूर्ण किरदार निभाती थीं।

गूंगी बहरी गीता को स्वदेश लौटा उन्होंने देश की जननी का गौरव प्राप्त किया था। वहीं काफी समय से उनका स्वास्थ्य ठीक ना होने के बाद भी स्वराज देश की सक्रिय राजनेता रहीं। पाकिस्तान में फँसे जाधव को निकालने की कोशिशों में भी स्वराज का किरदार अहम रहा।
हालांकि जाधव अभी भी पाकिस्तान की जेल में बंद हैं, लेकिन स्वराज अपनी ओर से पूरा दमखम दिखा जाधव को निकालने के प्रयासों में जुटीं थीं। कहना गलत नहीं होगा कि भारतीयों ने एक राजनेता को नहीं बल्कि भारत की जननी स्वरूप माँ ‘स्वराज’ को खोया है।

उनके अदम्य साहस से देशवासी भलीभांति परिचित रहे हैं। 1977 में मात्र 25 साल की उम्र में देश की यह प्रखर नेता अपने राजनैतिक जीवन में कदम रख चुकी थीं। ठीक 2 साल बाद 27 वर्ष की उम्र में स्वराज को भारतीय जनता पार्टी में मुख्य पद मिल गया था। स्वराज दिल्ली की पहली मुख्यमंत्री भी रहीं। देश की इस प्रखर नेता को असाधारण सांसद का पुरस्कार मिला था।

भारतीय जनता की इस लोकप्रिय नेता ने खराब स्वास्थ्य के चलते 2019 में चुनाव ना लड़ने की स्वइच्छा जताई थी। सुषमा स्वराज अंतिम दिनों में भारतीय राजनीति में कोई पद नहीं संभाल रही थीं, लेकिन देश की राजनीति में वह अपने अंतिम क्षणों तक सक्रिय रहीं। स्वराज के अंतिम संस्कार की क्रियाऐं दोपहर 3 बजे संपन्न की जाएंगी। देशवासियों की भावभिनी श्रद्धांजलि देश की इस कद्दावर नेता को समर्पित रहेंगी।