अहोई अष्टमी व्रत में इन बातों का रखना चाहिये ध्यान :
इस दिन अहोई मां की पूजा करने से पहले गणेश भगवान की पूजा करनी चाहिये।
ये व्रत तारों को देखकर खोला जाता है।
इसके अलावा आपको कथा सुनते समय 7 तरह के अनाज अपने हाथ में रखें और पूजा के बाद अनाज गाय को खिला दें।
कोशिश करे कि अहोई अष्टमी के व्रत पूजा करते समय बच्चों को साथ में बैठायें और पूजा के बाद मां को भोग लगाने के बाद वो प्रसाद अपने बच्चों में बांट दें।
अहोई अष्ठमी तिथि और शुभ मुहूर्त :
इस साल कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की अष्ठमी तिथि 28 अक्टूबर, गुरूवार के दिन होगी और इसी दिन अहोई माता का व्रत रखा जाएगा। अष्टमी तिथि शुरु: गुरुवार, 28 अक्टूबर 2021, दोपहर 12:49 से शुरू
अष्टमी तिथि खत्म : शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2021 , दोपहर 2:09 पर
पूजा का शुभ मुहूर्त -28 अक्टूबर 2021,
शाम 05:39 से 06:56 तक
अहोई अष्ठमी व्रत कथा:
प्राचीन समय में एक नगर में एक साहूकार रहा करता था जिसके सात लड़के थे। दिवाली से पूर्व साहूकार की पत्नी घर की सफाई और लीपा-पोती के लिए मिट्टी लेने गई और कुदाल से मिट्टी खोदने लगी। उसी जगह एक सेही जानवर की मांद थी।
साहूकार की पत्नी के हाथ से कुदाल सेही के बच्चे को लग गई जिससे वह बच्चा मर गया। साहूकार की पत्नी को इससे काफी दुख पहुंचा और वह पश्चाताप करती हुई अपने घर लौट आई। इस घटना के कुछ दिनों बाद साहूकार के बेटे की भी मौत हो गई।
फिर अचानक दूसरे, तीसरे और साल भर में उसके सातों पुत्र मर गए। एक दिन उसने अपने आस-पड़ोस की महिलाओं को विलाप करते हुए बताया कि उसने जान-बूझकर कभी भी कोई पाप नहीं किया है, लेकिन एक बार खदान में मिट्टी खोदते समय अनजाने में उससे एक सेही के बच्चे की हत्या हो गई थी और उसके बाद उसके सातों बेटों की मौत हो गई।
सभी औरतों ने साहूकार की पत्नी को कहा कि यदि तुम कार्तिक महीने की अष्टमी तिथि को भगवती पार्वती का स्मरण करके और उनकी शरण लेकर सेही और उसके बच्चे का चित्र बनाकर उनकी पूजा-अर्चना करो और क्षमा मांगो, ईश्वर की कृपा से तुम्हारा पाप दूर होगा। साहूकार की पत्नी ने उनकी बात मानकर कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को व्रत रखककर क्षमा-याचना की।
वह हर साल नियमित रूप से ऐसा करने लगी, बाद में उसे सात पुत्रों की प्राप्ति हुई। तब से ये कहा जाता है कि कार्तिक मास की अष्टमी तिथि को व्रत करने से संतान की दीर्घाऊ होती है ।