बम बम भोले के जयकारों के साथ आज लगभग देश की हर सड़कों पर कावड़ियों की धूम मची रहेगी। 30 जुलाई की यह वह तारीख है जब 17 जुलाई को शुरू हुए सावन की पावन बेला शुभ अवसर शिवरात्री का होगा। कावड़ियों की धूम आज शिवमंदिरों में हरिद्वार से जल लेकर आने में खास रहेगी।

आज सावन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली शिवरात्री का विशेष महत्व हिन्दु धर्म में माना गया है। सावन के इस पावन महीने के विषय में यह माना जाता है कि आस्था के इस अनोखे पर्व पर भगवान शिव स्वयं माँ पार्वती और दोनों पुत्र कार्तिकेय औऱ गणेश के साथ पृथ्वी पर विराजते हैं। यही वजह है शिव के उपासक शिव को विशेष अराधना और पूजन से प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं।

आज शिवरात्री का वह पावन अवसर है जिसका शिव भक्तों को पूरे वर्ष इंतज़ार रहता है। पान के पत्तों, मेवे, फलों और दूध मिठाई से भगवान शिव का विशेष अनुष्ठान शिव भक्त धूप-दीप से करेंगे।

शिव आराध्य जो सावन शुरू होते ही हरिद्वार के लिए पैदल यात्रा के लिए निकल पड़े थे आज जल लेकर लौटेंगे। हरिद्वार से जल लेकर लौटे कावड़िये शिवलिंग का विशेष अभिषेक करेंगे।

हिन्दु मान्यता के इस विशेष पर्व सावन की चकाचौंध आज लगभग हर छोटे-बड़े मंदिरों में रहेगी। अपने आराध्य देव शिव के पूजन हेतू जल और दूध से शिवलिंग का स्नान करवाया जाएगा।

शिव के पूजन से व्रत के पश्चात् पूरे दिन के उपवास के बाद शिव की विशेष स्तुती व पूजन होगा। शिव की विशेष महिमा भी भक्तों की मनोकामना पूर्ण कर उनके दुख-दर्दों को दूर करने के रूप में रहेगी।

शुभ मुहुर्तः
सावन के इस शुभ उपलक्ष में शुभ मुहुर्त की घड़ी आज प्रातः काल 9 बज़े से दिन के 1 बजे तक रहेगी। इसके अलावा इस बार चतुर्दशी तिथी आज के दिन शुरू होकर 31 जुलाई यानि कल दिन के 11 बजकर 57 मिनट तक रहेगी।
शिव पूजन को बनाऐं खासः

शिवरात्री के विशेष अवसर पर आज प्रातः स्नान कर साफ वस्त्र धारण कर लें। इसके बाद व्रत का संकल्प करें। बम-बम भोले का जाप करते हुए शिवलिंग पर पान के पत्तों के साथ शिवलिंग पर दूध अर्पण करें। हिन्दु धर्म में मान्यता है कि शिवरात्री के दिन शिवलिंग पर तिल चढ़ाने से भगवान शिव विशेष प्रसन्न होते हैं। शिवलिंग पर तिल चढ़ाने से सभी पापों का नाश होता है।

कुंवारी कन्याओं के लिए यह सावन के व्रत और विशेष शिवरात्री का व्रत शुभकारी माना जाता है। भारतीय मान्यताओं के अनुसार कुंवारी कन्याओं को सावन व्रत करने पर मनचाहे वर की प्राप्ति होना तय माना जाता है।

हिन्दु मान्यताओं के अनुसार शिवरात्री का यह वही पावन अवसर जब भगवान शिव माँ पार्तवी के साथ विवाह के बंधन में बंधे थे। अर्थात् शिवरात्री का यह पावन अवसर शिव और शक्ति के मिलन के रूप में खास है। साल भर में 12 शिवरात्रियों में सावन की शिवरात्री और महाशिवरात्री का ही विशेष महत्व माना जाता है। भक्तों के कष्टों को दूर कर उन्हें सुख-समृद्धि मिलने के रूप में सावन की यह शिवरात्री व्रत बेहद खास है।