भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने अपने मून मिशन की पूरी तैयारी लगभग कर ही ली थी। 14 जुलाई रविवार रात 2 बजकर 51 मिनट पर भारत का मिशन मून पृथ्वी से उड़ान भरने ही वाला था कि तकनीकी खराबी के चलते मिशन को रोक दिया गया है।

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से यह चर्चा तेज़ थी भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो चांद पर अपना यान, चंद्रयान-2 भेजने की पूरी तैयारी में है। यहाँ तक की इसकी अधिकारिक तारीख भी तय कर दी गयी थी। लेकिन यान में अचानक तकनीकी खराबी के पाए जाने के चलते भारत के मून मिशन पर कुछ समय के लिए विराम लग गया है।

चाँद पर यात्रा करने में भारत पहले भी बड़ी सफलता हासिल कर चुका है। 2008 में भारत के चाँद पर पहुँचने के मिशन को लेकर चंद्रयान-1 लॉन्च किया गया था।

उसी क्रम भारत की चाँद पर पहुँचने की यह दूसरी यात्रा होने वाली थी, जिस पर बिती रात अटकलें आई। यह भारत देश ही था जिसने अपने मून मिशन के दौरान आर्बिटर भेज चाँद की कुछ रोचक तस्वीरें दुनिया भर के समक्ष पेश की थी। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने ही चाँद पर पानी औऱ बर्फ होने की बात का दावा किया था।

जिसे बाद में नासा ने भी सही माना था। बता दें भारत के इस मून मिशन के लिए GSLV MK-3 ताकतवर रॉकेट का इस्तेमाल होने जा रहा था जिसकी जानकारी खुद बीते शनिवार को इसरो के चेयरमैन के. शिवान द्वारा दी गयी थी।
माना जा रहा था कि भारत का यह चाँद मिशन चाँद की दक्षिणी ध्रुव जहाँ कि अँधेरा होने की बात मानी जाती है, तक पहुँचने में खास होने वाला था। यदि चंद्रयान-2 की सफल लॉन्चिंग होती तो यान को चाँद के दक्षिणी धुव्र के हिस्से में पहुँचने में करीब 2 महीने का समय लगता।

भारत के अंतरिक्ष मिशन चंद्रयान-2 को 6 सितम्बर को चाँद की सतह पर पहुँचने का अनुमान लगाया जा रहा था। बीते रविवार रात होने वाली चाँद यात्रा को रोकने के बाद जल्द ही इसकी नई तारीख भी तय होने की पूरी संभावना है।
चंद्रयान मिशन किन मायनों में है खास

भारत का यह बेहद महत्वकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 पिछले मिशन से कई मायनों में खास और अलग होने वाला था। पिछले मिशन में भारत का यान चांद की बेहद रोचक तस्वीरें तो लेकर आया था लेकिन यह उसने चांद से 100 किलोमीटर की दूरी से ली थी। यानि पहला मिशन केवल चांद के कक्ष तक गया था वह चाँद पर उतरा नहीं था, लेकिन चंद्रयान-2 इस बार चाँद की सतह पर उतरने वाला था।
चाँद की इस धुव्रीय हिस्से पर पानी की अधिक मात्रा होने की संभावनाऐं तेज़ थीं, यानि चंद्रमा में मौसम, खनिजों और रासायनिक तत्वों के अध्ययन के लिए यह मिशन खास था।

चंद्रमा के इस हिस्से में अभी तक किसी भी देश के यान ने पहुंचने में सफलता हासिल प्राप्त नहीं की है, भारत पहला देश होने वाला था। हालांकि चंद्रयान-2 के इस मून मिशन के बाद चांद की सतह पर सॉफ्ट लैडिंग करने वाला भारत रूस अमेरिका और चीन के बाद चौथा देश होने वाला था।