भारत में सूचना क्रांति के जनक व पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की जिंदगी के यादगार किस्से

देश में सूचना क्रांति के जनक स्वर्गीय राजीव गाँधी की आज 75 वीं जयंती का अवसर है।

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देश भऱ से पुण्य आद्मा देश के पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। बेटी प्रियंका गाँधी और बेटे राहुल गाँधी ने भी पिता की याद में उनके लिए खूबसूरत पोस्ट ट्वीटर पर शेयर की हैं।

इस अवसर पर राजीव गाँधी को याद करते हुए देश भर में राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस की ओर से कार्यक्रम रखे गए हैं।

इस क्रम में आज से ठीक 2 दिन बाद 22 अगस्त को कांग्रेस की ओर से दिल्ली के इंदिरा गाँधी इनडोर स्टेडियम में भी पूर्व प्रधानमंत्री की याद में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया है।

चलिए जानते हैं भारत के पूर्व प्रधानमंत्री व दिग्गज नेता राजीव गाँधी के जीवन से जुड़े यादगार किस्सेः

राजनीतिक जीवन-

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भारतीय पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी आज़ाद भारत के छठे प्रधानमंत्री बने थे। उनका यह कार्यकाल साल 1984 से 1989 तक का रहा। उन्होंने समय और हालातों के फलस्वरूप यह पदाभार संभाला था।

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राजनीति में नहीं थी रूचि-

यह राजीव गाँधी के विषय में सुनने हुए रोचक ही लगता है कि उनकी कभी राजनीति में रूची थी ही नहीं, बावजूद उन्होंने कई अविस्मरणीय कार्य भारत की जनता के लिए किये।

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उन्हें देश मे सूचना क्रांति के विकास का श्रेय प्राप्त है। गौरतलब है कि राजीव गाँधी का प्रधानमंत्री का पदाभार संभालना देश और समय की जरूरत थी। वे तो एक एयरलाइन में पायलट की नौकरी कर रहे थे। किंतु माँ इंदिरा गाँधी का राजनैतिक जीवन काफी फल-फुल चुका था। देश की आइडल लेडी के रूप में इंदिरा गाँधी को आज भी याद किया जाता है।

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इंदिरा गाँधी के राजनैतिक जीवन में चल रही उठा-पटकों और भाई संजीव गाँधी की अकाल मौत के बाद वे ही माँ इंदिरा का सहारा बने। रूची ना होते हुए उन्होंने माँ के कार्यभार को बाँटने का कार्य किया।

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माँ का सहारा बनते हुए राजनीति में प्रवेश

इंदिरा गाँधी की उन्हीं के सुरक्षा कर्मियों द्वारा मौत ने राजीव गाँधी को देश का मुख्य पदाभार सौंप दिया। हालांकि उनकी भी राजनैतिक जीवन के प्रवेश के बाद एक हादसे में दर्दनाक मौत हो गयी थी।

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माना जाता है कि राजीव गाँधी इस बात से भलीभांति परिचित थे कि गाँधी परिवार आतंकवादियों के निशाने पर है। बावजूद इसके उन्होंने अपने साहस का परिचय देते हुए भारतीय राजनीति में मां इंदिरा का सहारा बने। अमेठी से सांसद के रूप में 1972 में उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया। 1982 में इंदिरा की मृत्यु के बाद राजीव गाँधी भारी मतों से जनता के शासक बने।

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राजनीतिक जीवन में किये कई विकास कार्य

राजीव गाँधी ने अपने राजनैतिक जीवन में भारत को विकास की दौड़ में शामिल करते हुए सूचना क्रांति को बढ़ावा दिया। उन्होंने भारतीय मतदाताओं के अधिकारों को सुरक्षित रखते हुए वोट देने की आयु सीमा 21 वर्ष से घटा कर 18 वर्ष कर दिया।

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बोफोर्स तोप की खरीददारी में लगे घोटाले का कांग्रेस पर आरोप, देश की राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस को चुनावों में पूर्ण बहुमत ना मिलने का एक बड़ा कारण बना था। बावजूद इसके राजीव गाँधी को बहुमत से सरकार बनाने का मौका मिला किंतु उन्होंने जीत के बावजूद भी देश के प्रधानमंत्री का पदाभार आगे संभालने से इंकार कर दिया। जिसके बाद बीजेपी की ओर से विश्वनाथ प्रताप सिंह द्वारा प्रधानमंत्री का पद संभाला गया।

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आज़ाद भारत के छठे प्रधामंत्री राजीव गाँधी के सभी विकास कार्यों से उन्हें देशवासियों द्वारा सदैव ही याद रखा जाएगा।

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देश को संबोधित करते हुए ही ली आखिरी सांसे

साल 1991 में देश के यह दिग्गज नेता देश को तमिलनाडु के चेन्नई से संबोधित करते हुए बम ब्लास्ट का शिकार हुए थे। जिसके बाद इन्होंने हमेशा के लिए भारतीय राजनीति के साथ-साथ अपने परिवार से भी अलविदा ले ली।