देश में ऑटो सेक्टर इन दिनों मंदी की मार से बेहाल है। बिक्री में आई कमी और जीएसटी में कोई छूट ना मिलने के कारण ऑटो सेक्टर सुस्त पड़ा हुआ है।
इस सेक्टर से जुड़े उद्योगपतियों की खासी मांग है कि सरकार इस आर्थिक मंदी के दौर से गुजरने में उनकी कुछ सहायता करे। उद्योग पति चाहते हैं कि राज्य सरकार जीएसटी की दरों को अगर 28% से घटा कर 18% कर दे तो ऑटो सेक्टर इस आर्थिक मंदी के दौर जल्दी ही उभर पाएगा।

वहीं राज्य सरकारें ऑटो सेक्टर में जीएसटी में किसी भी प्रकार की छूट देने को तैयार नहीं है। राज्य सरकारों का मत है कि जीएसटी में कटौती करने का मतलब राज्य सरकार की आमदनी में कटौती करना होगा। ऐसे में राज्य सरकारें अन्य जरूरतों के लिए केंद्रीय सरकार पर निर्भर हो जाएगी।

वहीं केंद्र सरकार भी फिलहाल राज्य सरकारों की अत्यधिक वित्तीय सहायता करने की स्थिति में नहीं है। हालांकि देश का वित्त मंत्रालय ऑटो सेक्टर के लिए कुछ राहत पैकेज़ तैयार जरूर कर रहा है। लेकिन इसमें जीएसटी की दरों में कटौती का कोई विकल्प नहीं है।

गौरतलब है कि फिलहाल देश में आर्थिक स्थिति बहुत बेहतर नहीं है। ऐसे में जीएसटी में कटौती का तो विकल्प ही नहीं बनता। दरअसल केंद्रीय सरकार का असल मत यह है कि ऑटो सेक्टर में बिक्री से देश में रेवेन्यू के बहुत बेहतर विकल्प नहीं मिलते।

वहीं यदि जीएसटी में कटौती कर दी गयी तो रेवेन्यू में अत्यधिक गिरावट का संकट पैदा हो सकता है। जो देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति को देखते हुए सही नहीं होगा। इसके कारण केवल केंद्रीय सरकार पर वित्तीय भार ही बढ़ेगा और कुछ नहीं।

अभी हाल ही में देश की जानी मानी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी की ओर से भी खराब खबर आई थी। वाहन क्षेत्र में सुस्ती के दौर से जूझते हुए मारुति सुजुकी ने अपने 3000 अस्थाई कर्मचारियों को नौकरी से निकाला था।

मारुति सुजुकी के चेयरमैन आर सी भार्गव कहते हैं कि यह पूर्ण रूप से मांग पर निर्भर करता है कि अस्थाई कर्मचारियों की संख्या कितनी हो। यानि जब मांग बढ़ती है तो अनुबंध पर ज्यादा कर्मचारियों की भर्ती की जाती है औऱ जब मांग घटती है तो उनकी संख्या कम की जाती है। इसके साथ भार्गव चेताते हैं कि – वाहन क्षेत्र अर्थव्यवस्था में बिक्री, सेवा, बीमा, लाइसेंस, वित्तपोषण परिवहन से जुड़ी नौकरियाँ सृजित करता है। यदि वाहन बिक्री में थोड़ी सी भी गिरावट आती है तो नौकरियों पर बड़े पैमाने पर असर पड़ेगा।

यहाँ भार्गव का भी यही मत है कि सरकार को जीएसटी की दरों में कुछ कटौती करनी ही चाहिए। यह सरकार की ओर से सकारात्मक प्रयास होगा। अन्यथा देश की आर्थिक मंदी का प्रभाव जहाँ अब तक केवल ऑटो सेक्टर पर ही बड़े रूप में दिख रहा है शीघ्र ही अन्य सेक्टर भी इससे प्रभावित होंगे।