हौंसलों की नई राह में अंतरिक्ष के रहस्यों को भेदेंगे इसरो के मिशन

Sriharikota: Space agency Indian Space Research Organisation (ISRO) successfully launching a record 104 satellites, including India’s earth observation satellite on-board PSLV-C37/Cartosat2 Series from the spaceport of Sriharikota on Wednesday. PTI Photo(PTI2_15_2017_000107B)

‘संपर्क टूटा है संकल्प नहीं’ इसी नए उद्देश्य के साथ आज भारतीय अपने साइंटिस्टों का हौंसला बुलंद कर रहे हैं। वैज्ञानिकों की एक छोटी सी गलती ही मात्र रही होगी कि चंद्रयान 2 का विक्रमलैंडर चंद मिनटों की दूरी पर अपने लक्ष्य से ही डगमगा गया होगा।

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लेकिन देश को निश्चित ही अपने देश के इन सांटिस्टों पर गर्व है जिन्होंने किसी हॉलिवुड फिल्म से कम लागत में चाँद के उस हिस्से के करीब जाना तो संभव बनाया जहाँ आज तक कोई ना पहुंच पाया था।

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यह खुद में एक बड़ी बात है। आशा की किरण निराशा में बदलने के लिए नहीं धुंधलायी है यह एक नया उजाला लेकर आएगी। इसी यकीन के साथ देश के प्रधानमंत्री ने इसरो के सांइटिस्टों की पीठ थपथपाई है। इसरो चीफ की नम होती आँखों को प्यार का कंधा भी हौंसलों की बुलंदी के दिया गया।

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इन्हीं सब के बीच अब खबर आ रही है कि चाँद के करीब पहुँचे विक्रम लैंडर से इसरो चीफ खुद संपर्क साधने की एक सफल कोशिश करेंगे। हालांकि इस विषय में अभी यह साफ ही नहीं हो पाया है कि मिशन मून के तहत चंद्रयान 2 का लैंडर विक्रम राह भटक गया है या क्रैश हो गया है।

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लेकिन यदि विक्रम लैंडर राह भटका होगा तो उससे संपर्क साधने का एक सफल प्रयास हमारे सांइटिस्ट इसरो चीफ के शिवन के साथ करेंगे। वहीं उम्मीद की एक किरण अभी भी चंद्रयान 2 के इस मिशन के तहत अंतरिक्ष में रहेगी। गौरतलब है कि मून मिशन के अंतर्गत भेजे गए ऑर्बिटर की भी एक महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।

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इसरो चीफ ने बयान दिया है कि ऑर्बिटर में एकस्ट्रा फ्यूल है, जिससे उसकी लाइफ 2 साल से ज्यादा अन्य 5 साल और हो सकती है। बता दें ऑर्बिटर अभी तक तय रणनीति के अनुसार कार्य कर रहा है। वह इसरो को अंतरिक्ष से जुड़ी विभिन्न रोचक तस्वीरें अपने कार्य के अंतर्गत भेजता रहेगा।

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इसी के साथ ऐसा नहीं है कि भारत के अंतरिक्ष से जुड़े मिशनों में विक्रम लैंडर के साथ संपर्क टूटने के साथ ही विराम लग गया है। बल्कि देश के अंतरिक्ष से जुड़े मिशनों की तो अभी भी एक कतार सजती है।

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चाँद के आगे आसमां छूने की डगर में अगले साल 2020 में इसरो का आदित्य एल1 मिशन अपने लक्ष्य की ओर बढ़ेगा। इसरो का यह मिशन सूर्य के पास पहुँच विभिन्न तरह की अनोखी जानकारियों को जुटाने का होगा।

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इसके बाद इसरो का बहुचर्चित मिशन गगनयान भी लक्ष्य की ओर बढ़ेगा। इसरो का गगनयान प्रोजेक्ट साल 2022 में अपने मिशन की ओऱ बढ़ेगा। इस प्रोजेक्ट के तहत स्पेस में इंसान को भी भेजा जाएगा। इसरो का चंद्रयान-2 मून मिशन केवल मशीनि उपकरणों का मिशन था। वहीं गगनयान के अंतर्गत अंतरिक्ष में तीन यात्रियों को 7 दिन तक रखा जाएगा।

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साल 2023 के लिए इसरो द्वारा प्रोजेक्ट शुक्रयान अस्तित्व में लाया जाएगा। इसरो अपने  प्रोजेक्ट शुक्रयान को शुक्र ग्रह की स्टडी के लिए उसकी कक्षा में भेजेगा।

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चर्चित मंगलयान एक बड़ा प्रोजेक्ट भी इसरो की इस कतार में होगा। मंगलयान 2 मंगल ग्रह की स्टडी के लिए नए कीर्तिमान स्थापित करेगा। गौरतलब है कि मंगलयान 2 मंगल ग्रह की स्टडी करने के लिए उसकी कक्षा के ओर करीब जाएगा।