क्या है कोरोना वायरस और साल 2020 का कनेक्‍शन, जानिए न्यूमरोलॉजिस्ट डॉ. नवनिधि के वाधवा से

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इन दिनों कोरोना वायरस का प्रकोप दुनियाभर में परेशान कर रहा है. वैज्ञानिक, डॉक्टर्स इसके वैक्सीन, एंटी-डॉट की खोजबीन और टेस्ट में लगे हैं. इसी बीच कोरोना को लेकर ज्योतिष विज्ञान में किस तरह की बातें की जा रही हैं, इसके बारे में बताया है, ज्योतिषी, न्यूमरोलॉजिस्ट, ग्राफोलॉजिस्ट, वास्तु सलाहकार, एनएलपी विशेषज्ञ और हीलर डॉ. नवनिधि के वाधवा ने. डॉ. नवनिधि इन दिनों अपने एक संस्‍था अन्नपूर्ति फूड ड्राइव के जरिए लॉकडाउन में दिहाड़ी मजदूरों और गरीबों पर खाने को लेकर आई चुनौती पूरा भी करती हैं. रोजाना उनकी संस्‍था गरीबों को खाना खिलाने का काम कर रही है.
डॉ. नवनिधि के वाधवा बताती हैं, “साल 2020 में दो बार दो आते हैं. यह चंद्रमा का साइन है. चंद्रमा को शीतल माना जाता है. यह इंसानों की श्वसन प्रणाली (Respiratory System), सर्दी-जुकाम, खांसी की समस्या को बढ़ाता है. जबकि जब इस साल के अंकों का योग निकालते हैं तो चार आता है. चार को राहु का संकेत मानते हैं. यह इंसानों को अस्थिर करता है. साथ ही कई अप्रत्याशित समस्याएं लाकर खड़ा कर देता है. सब ठीक चलता रहेगा, फिर अचानक सब खराब हो जाता है. बतौर न्यूमरोलॉजिस्ट, हीलर जब मैं मौजूदा हालात को देख रही हूं तो तो मैं कह सकती हूं कि इस दौर पर राहु का काफी असर है.
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डॉ. नवनिधि बताती हैं राहुल आमतौर पर आता है तो अपने साथ अंधेरा ओर धुंआ लेकर आता है. वह लोगों में भय, भ्रम पैदा करने में माहिर है. लेकिन चुनौती ये रहती है कि डर किस बात का है ये हमें दिखाई नहीं देता. एक अनकहा, अनजाना डर सताता रहता है. कोरोना भी यही डर लेकर आया है.
डॉ. नव‌निधि के वधावा ने बताया कोरोना के फैलने के पीछे ज्योतिष संबंधी कारण, ऐसे करें बचाव
डॉ. वाधवा के अनुसार, सभी संज्ञा का अपना एक नंबर होता है. जब हमने कोरोना वायरस के अक्षरों और संज्ञा के अंकों का अध्ययन किया तो ये योग दो आता है. साल में दो बार अंक दो आना और कोरोना वायरस का अंक भी दो होना, यह मिलकर ज्यादा बड़ी परेशानी खड़ी करते हैं. हालांकि इंडिया का योग तीन है. इसिलए ऐसी उम्मीद की जा रही है कि भारत इसे नियंत्रित करने में सफल हो जाएगा. क्योंकि 3 को बृहस्पति (गुरु) का साइन माना जाता है. इसे सबसे बड़ा ग्रह मानते हैं. साथ ही इसमें बहुत गर्मी भी है. इसलिए माना जाता रहा है कि चंद्र के प्रभाव को कम करने में इंडिया सक्षम है. हालांकि यह महीना चौथा है, जो राहु का समर्थक है. इसलिए 2020 के इस महीने में राहु में राहु की शक्ति आ गई है. सबसे खतरनाक महीना अप्रैल का है. इस वक्त सभी को ज्यादा से ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पांच अप्रैल की रात नौ बजे नौ मिनट दीया जलाने के फैसले को लेकर डॉ. वाधवा कहती हैं, न्यूमोरोलॉजी के अनुसार देखें तो नौ को वॉरियर का नंबर माना जाता है. इस पर मंगल का प्रभाव होता है. आमतौर इन्हें विजय भी मिलती है. पीएम मोदी ने इसीलिए नौ को दो बार नौ बजे नौ मिनट का आह्वान किया. इसमें जीत की संभावनाएं बढ़ जाती हैं. इसी तरह लाइट बंद कराने के पीछे भी एक बड़ा तर्क है. इलेक्ट्रॉनिक्स के सामान में राहु वा वास रहता है. साथ ही अंधेरे में भी. लेकिन पीएम ने जब दरवाजे पर दीया जलाने को कहा तो इसका मतलब ये था कि वो घर से राहु को निकालकर दरवाजे के बाहर कराना चाहते हैं. आग असल में पूरी परिस्थिति को बदल देती है. जैसे हम खाना बनाते हैं तो आग लगने से पहले और लगने के बाद आपको पूरा फॉर्म ही बदला मिलेगा. इसीलिए दीया जलाने, प्रकाश लाने के लिए पीएम ने कहा. मैं ये भी कहना चाहती हूं कि हमें मोबाइल के टॉर्च को चलाने से भी बचना चाहिए था.
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इतना ही नहीं डॉ. वाधवा 21 दिन के लॉकडाउन के नंबर्स को लेकर भी कहती हैं कि इनका योग तीन आता है. तीन भारत के लिए सबसे उचित स्थिति होती है, क्योंकि खुद इंडिया के अक्षरों का योग तीन है. तीन दुनिया के सबसे बड़े प्लेनेट को इं‌डिकेट करता है. ऐसे में पीएम ने 21 दिनों का आह्वान किया होगा. क्योंकि कोरोना से लड़ने के लिए यही नंबर सबसे मुफीद हो सकता था. साथ ही एक वैज्ञानिक मान्यता है कि किसी भी शख्स को किसी नई आदत को डालने के लिए कम से कम 21 दिनों तक नियम‌ित उसक काम को करना चाहिए. मुझे इसका कारण नहीं पता, वे ऐसा क्यों मानते हैं. लेकिन बतौर न्यूमोरोलॉजिस्ट मैं इस तथ्य के आधार पर मैं ये कह सकती हूं कि 21 दिन वाला फैसला लेकर पीएम लोगों को घरों में रहने की आदत डलवा देंगे.
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ऐसे दौर में जब लोगों में खाने-पीने की तक समस्या को लेकर चुनौती बनी हुई है, उसी दौर में डॉ. नवनिधि अपनी संस्‍था अन्नपूर्ति फूड ड्राइव भी चला रही हैं. वो इसके बारे में बताती हैं कि संस्‍था अभी रोजाना 11 लोगों को खाना खिला रही हैं. साथ ही वो कुछ अन्य संस्‍थाओं से जुड़कर लोगों में आवश्यक सामान जैसे चावल, आटा आदि के पैकेट भी बांटने की दिशा में अग्रसर हैं.