देश में जहाँ एक ओर आज़ादी के 72 वर्ष पूरे होने के जश्न की तैयारियाँ जोरो शोरों पर हैं, वहीं कश्मीर में सियासत का मुद्दा भी तेज़ है। देश के अन्य राज्य जहाँ बंधन की बेड़ियों को तोड़ने का जश्न मनाऐंगे, वहीं कश्मीर की आवाम को खुद के अधिकारों का खोने का भय सता रहा है।

कश्मीर में चल रही हलचल इन दिनों देश का बड़ा मुद्दा बनी हुई है। इस बात की पूरी आशांकाऐं जतायी जा रही हैं कि कश्मीर की जनता के लिए जल्द ही केंद्रीय सरकार कुछ नए फरमान जारी कर सकती है। राजनीतिक पार्टियों में भी हलचलें तेज़ हो गयी हैं। इस बात की चर्चाऐं तेज़ हो गयी हैं कि देश की केंद्रीय सरकार जल्द ही कश्मीर से उनके विशेषाधिकार आर्टिकल 35a को हटा सकती है।

वहीं राज्य में सुरक्षा के कड़े इतज़ामों के बीच फिलहाल के लिए अमरनाथ यात्रा भी रोक दी गयी है। राज्य में कर्फ्यू जैसे हालात बन गए हैं। मोबाइल सेवाऐं और इंटरनेट सेवाऐं बंद कर दी गयी हैं। राज्य में धारा 144 भी लागू कर दी गयी है।

राजनीतिक पार्टियों में गहमागहमी का माहौल बना हुआ है। राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के लगातार बयान आ रहे हैं। महबूबा मुफ्ती व अन्य क्षेत्रीय पार्टियों के नेता ने यह मान ही लिया है कि केंद्रीय सरकार राज्य से आर्टिकल 35a का विशेष प्रावधान खत्म करने वाली है। वहीं इस क्रम में उन्होंने सरकार को चेताते हुए बयान भी दिए हैं कि राज्य में यदि सरकार आर्टिकल 35a खत्म करने का सोच रही है तो इसके परिणाम घातक होंगे।

तो चलिए बताते हैं आपको क्या है धारा 35a और धारा 370 के तहत कश्मीर राज्य के स्थानीय निवासियों को विशेष अधिकारः
कश्मीर राज्य के निवासियों को परिभाषित करते हुए आर्टिकल 370 के तहत विशेष अनुच्छेद आर्टिकल 35a जोड़ा गया था। इस आर्टिकल में मुख्य रूप से कश्मीर की स्थानीय नागरिकता को परिभाषित किया गया है।

आर्टिकल 35a कश्मीर के नागरिकों को विशेष दर्जा प्रदान करता है। 1954 में इसे तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा संविधान में जोड़ा गया था। राज्य को मिले विशेष अधिकारों के तहत राज्य के नागरिकों के अलावा कोई अन्य राज्य का व्यक्ति कश्मीर में संपत्ति नहीं खरीद सकता है।

इसके अलावा कश्मीर को विशेष अधिकार प्राप्त है कि राज्य की नौकरियाँ केवल राज्य के नागरिकों के लिए सुरक्षित रखी जाऐंगी। वहीं राज्य में आर्टिकल 370 के अनुरूप देश की केंद्रीय सरकार को राज्य में पूर्ण अधिकार प्राप्त नहीं है।

देश की केंद्रीय सरकार राज्य में केवल रक्षा, विदेशी मामलों और संचार से संबंधित मामलों में ही फैसले ले सकती है। अन्य क्षेत्रों के संबंध में फैसला लेने के लिए केंद्रीय सरकार को राज्य सरकार से अनुमति प्राप्त करनी होगी। जो कि कश्मीर को अन्य राज्यों के क्रम में भिन्न बना देता है।

राज्य में कई दिनों से चल रही अफरातफरी के बीच यह बात सामने आ रही थी कि सरकार जल्द ही कुछ बड़ा फैसला ले सकती है। सरकार की ओर से इस बात पर मोहर लगा दी गयी थी कि सरकार सोमवार यानि आज के दिन बड़ा फैसला लेगी। वहीं इस बात से अब पर्दा उठ गया है। सरकार ने कड़े सुरक्षा इंतज़ामों के बीच आर्टिकल 370 के विशेष प्रावधान को खत्म करने का बिल पास कर दिया गया है। ज़ाहिर है हर-हर मोदी की राह में रोड़ा कश्मीर का आर्टिकल 370 ही था। ऐसे भी मोदी सरकार द्वारा आर्टिकल 370 खत्म करने के साथ देश में अलग-अलग प्रतिक्रियाऐं आना भी तेज़ हो गया है। देखना होगा कि सरकार के इस फैसले पर कश्मीर की आवाम अपनी क्या प्रतिक्रिया दर्ज करवाती है।
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