लोकसभा चुनाव 2019 का महासंग्राम भला एक –दूसरे पर आरोप प्रत्यारोपों के बिना कैसे पूरा हो सकता है। चुनावी पार्टियाँ एक-दूसरे को कमतक आँकने का प्रयास हर चुनावी रैली में इन दिनों, आप को करती दिख जाऐंगी। कभी-कभी चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशियों की एक-दूसरी पार्टी से दंगल हास्यपद के सभी जंजीरों को तोड़ जाती है। चुनावी प्रकरण तो आरोप-प्रत्यारोपों से भरे होते ही हैं साथ ही चुनावी नेताओं के बोल कभी-कबार जनता का जरूर गुदगुदाने का कार्य कर जाते हैं।

इस वाक्या से आप भली भांति परिचित होगें कि अभी हाल में मध्यप्रदेश में कांग्रेसी नेता, दिग्गविजय सिंह की रैली के दौरान क्या हुआ था। दरअसल, दिग्गविजय सिंह के मंच पर भाषण देते समय वह जनता को पूछ बैठे कि मोदी ने किस किस के अकांउट में 3 लाख रुपये भेजे हैं। दिग्गविजय जी ने सोचा होगा कि शायद ही कोई ऐसा होगा जो हाथ उठाएगा। पर उनका दांव उन पर ही उलटा पड़ गया जब जनता में से एक व्यक्ति उनके सामने आ गया। उसने दावा तो 3 लाख आने का किया था, पर मंच पर जाते ही वह मोदी की सर्जिकल स्ट्राइक का गुणगान करने लगा। इससे पूर्व वह यह गुणगान पूरा गा पाता उसे मंच से एक बाहुबली जैसे नेता द्वारा खदेड़ दिया जाता है। यह स्तिथि जनता के लिए हास्यपद बन कर रह गयी। इस प्रश्न का उत्तर तो अब आपको वह व्यक्ति ही दे सकता है कि यदि वह मोदी समर्थक था तो दिग्गविजय की रैली में क्या कर रहा था।

और तो और अति तो तब हो गई जब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के नेता एक कार्यक्रम के दौरान जनता को धमकाते नज़र आए कि पहला नम्बर यानि कांग्रेस का बटन दबाना है अन्यथा उन्हें करंट लग जाएगा। अब नेता की बातों में कितनी सच्चाई थी यह तो वही बता सकते हैं। एक बात तो तय है कि जनता को भोली-भाली समझने वाले ये नेता पार्टी का प्रचार का तो पता नहीं लेकिन जनता को गुदगुदा यानि हँसा-हँसा कर लोट-पोट करने का कार्य जरूर कर रहे हैं।

गुजरात में बीजेपी के एक नेता जनता को कहते हैं कि वोटिंग रूम में कैमरे लगा दिये गये हैं और यदि आपने हमें वोट नहीं दिया तो हमें दिख जाएगा, मोदी को पता चल जाएगा।

अभी हाल ही में बॉलिवुड अभिनेता ने वर्तमान प्रधानमंत्री का साक्षात्कर लिया था जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए कहा था कि दीदी उन्हें बंगाल से नई-नई मिठाईयाँ भेजवाती रहती हैं। इसके जवाब पर ममता पीएम पर तंज कसते हुए कहती हैं कि मोदी को बंगाल की जनता से रसगुल्ले जरूर मिलेंगे लेकिन यह मिट्टी-कंकड़ से बने होगें। और यदि मोदी ने इसे खाने का प्रयास किया तो मोदी के दांत जरूर टूट जाएंगे। यह आम बात है कि चुनाव के दौरान अक्सर हमें ऐसे वाक्या देखने को मिल ही जाते है। आरोपों-प्रत्यारोपों, हँसाने-गुदगुदाने का यह दौर तो चुनावी दंगल खत्म होने पर ही थमेगा। परंतु इस दौरान बेहद आवश्यक है कि जनता अपना वोट एक तय रणनीति से बिना किसी के बहकावे में आकर किसी पार्टी को दे।