छठ पूजा का विशेष महत्व माना जाता है, कहा जाता है कि छठ पूजा का व्रत करने से संतान की लंबी उम्र होती है। इससे जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा को छठ पूजा करने की सलाह दी थी तभी से महिलाएं यह व्रत कर रही हैं।
इस दिन महिलायें निर्जला व्रत रखती हैं, छठ पूजा की शुरुआत नहाय-खाय से होती है और इस व्रत में सूर्य देवता की पूजा कि जाती है।इस साल छठ पूजा 8 नवंबर 2021, के दिन की जायेगी, 8 नवंबर से नहाय-खाय शुरू होगा और इसके अगले दिन 9 नवंबर को खरना और 10 नवंबर को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जायेगा ।इसके बाद 11 नवंबर की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पूजा का समापन किया जायेगा।
पहला दिन:
पहला दिन: नहाय-खाय
छठ पूजा की शुरुआत नहाय-खाय के साथ होती है और इस दिन स्नान करने के बाद सूर्य देवता को साक्षी मानकर व्रत का संकल्प लिया जाता है। फिर इसके बाद चने की सब्जी, चावल और साग का सेवन करने के बाद व्रत की शुरुआत की जाती है।
दूसरा दिन: खरना
छठ पूजा के दूसरे दिन खरना होता हे और इस दिन महिलाएं व्रत करती हैं, शाम को इस दिन गुड़ की खीर बनाई जाती है।
तीसरा दिन: छठ
तीसरे दिन छठ होती है और इस दिन महिलाएं किसी तालाव, नदी या घाट पर जाती हैं, वहां जाकर छठी मैया की पूजा—अर्चना करती हैं। पूजा में महिलाएं पानी में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देती हैं।
चौथा दिन: पारण
छठ पूजा के चौथे दिन व्रत का पारण किया जाता है और छठ पर्व का समापन होता है. इस दिन महिलाएं सुबह सूर्यादय से पहले घाट पर जाकर पानी में खड़ी होती हैं और उगते सूर्य की पूजा कर अर्घ्य देती हैं।