वक़्त बदला या तुम बदले

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बहुत कोशिशों के बाद, तुम्हें भुलाया है
बहुत कोशिशों के बाद, आज फिर से जिंदगी में हसीं साया है
समझ नहीं आता कि, वक़्त बदला, या तुम बदले
या ये सब, वक़्त का तकाज़ा है।।

हजारों वादों कसमों के चलते, तुम पर मैंने एतबार किया
छोड़ोगे ना कभी तुम मेरा साथ, यह सोचकर तुमसे प्यार किया
पर तुम ने ही तोड़ दिया, मेरा ख़्याबों का घरौंदा
तुमने हीं मेरी मोहब्बत को, सरेआम रुसवा किया ।।

में भी वहीं हूं, तुम भी वहीं हो, तो फिर क्यों वक़्त ने हमें जुदा किया
समझ नहीं आता कि वक़्त बदला, या तुम बदले, या फिर ये सब वक़्त का तकाजा है।।

Writer- Kalpana Chauhan