बिहार में चमकी बुखार से मरने वाले बच्चों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। चमकी बुखार का कोहराम राज्य स्तर पर ही नहीं राष्ट्रीय स्तर इन दिनों परेशानी का एक बड़ा कारण बन गया है। बीते शुक्रवार 12 बच्चों की चमकी बुखार से मौत हो गयी। इस साल चमकी बुखार से दम तोड़ने वाले बच्चों की संख्या 72 का आँकड़ा छू चुकी है।
वहीं लगभग 2000 बच्चे चमकी बुखार से संक्रमित होकर बिस्तर पर हैं। सरकार, प्रशासन सभी सकते में हैं कि आखिर बच्चों में मौत की असल वजह क्या है। चमकी बुखार का एक बड़ा कारण बच्चों में लिची खाने को बताया जा रहा है। यानि लिची खाना देश के इस राज्य में जानलेवा साबित हो रहा है।

गौरतलब है कि चमकी बुखार का यह कोहराम इस साल ही नया नहीं है। यह पिछले कुछ वर्षों कई मासूमों को अपना शिकार बना चुका है। माना जा रहा है कि चमकी बुखार का यह वायरस जापान का है।

क्यों कि बुखार के लक्षण जापानी इनसेफलाइटिस से मिलते हैं। पर यहाँ भी समस्या यह है कि वायरस जापानी ही है की बात भी निश्चित तौर पर नहीं कही जा सकती। क्योंकि जापानी वायरस की जाँच कर रिपोर्ट आने में लगभग 1 महीने का लंबा समय लग जाता है। बुखार की जड़ें कहीं ना कहीं लिची से जुड़ी बताई जा रही हैं।

आखिर बिहार में लिची खाना क्यूं इतना महंगा पड़ रहा है कि बच्चों को इसकी कीमत जान चुका कर देनी पड़ रही है। आइए जानते हैं जापानी इनसेफलाइटिस, चमकी बुखार से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें
- बिहार में बच्चों की मौत की वजह तेज बुखार आना है। जो कि लिची खाने से ठीक बाद होना, बच्चों में बताया जा रहा है।
- लिची खाने का संबंध दरअसल लिची में पाए जाने वाले खास केमिकल से है। जो सीधे दिमाग पर अटैक करता है।
- सरकारी रिपोर्टों के मुताबिक चमकी बुखार गरीब व कुपोषित बच्चों को अपना शिकार सबसे अधिक बना रहा है।
- ज्यादा लिची पाए जाने वाले इलाके में बच्चों को भूखे पेट लिची ना खाने की सलाह दी जा रही है।
- लॉ ब्लड शुगर वाले बच्चे भी यदि भूखे पेट लिची को खाते हैं तो इसमें पाए जाने वाला केमिकल भूखे पेट के कारण तुरंत हरकत में आकर सीधा दिमाग पर अटैक करता है।
- इस चमकी बुखार के लक्षण लिची खाने के बाद तेज बुखार आना है। तेज बुखार के बाद तुंरत चमकी बुखार का प्रभाव दिमाग में सूजन आना है। दिमाग में सूजन आने से कुछ ही घंटों में यह प्रभाव में आए बच्चे की जान ले लेता है।

चमकी बुखार कहर थमने में कितना समय लगेगा यह कह पाना मुश्किल है। भारत सरकार व सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय लगातार चमकी बुखार से निपटने के भरकस प्रयास कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि वर्ष 2014 में जब डॉ हर्षवर्धन स्वास्थ्य मंत्री थे तो उन्होंने चमकी बुखार से बचाव के लिए टीके की बात रखी थी लेकिन किसी कारण टीके की व्यवस्था नहीं हो पाई।

तब से हर साल यह जानलेवा बुखार बच्चों पर अपना कहर बरसा रहा है। एक बार फिर मोदी सरकार के प्रशासन में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन बने हैं। इसलिए यह मौजूदा सरकार की जिम्मेदारी कहीं ना कहीं और बढ़ा देती है। भारी मतों से विजयी मोदी सरकार के लिए चमकी बुखार से निपटना इस बार एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है।
गर्मी के मौसम में फल और खाना जल्दी खराब होता है. घरवाले इस बात का खास ख्याल रखें कि बच्चे किसी भी हाल में जूठे और सड़े हुए फल नहीं खाए. बच्चों के गंदगी से बिल्कुल दूर रखें. खास कर गांव-देहात में जो बच्चे सूअर और गाय के पास जाते हैं गर्मियों में दूरी बना कर रखें. खाने से पहले और खाने के बाद हाथ ज़रूर धुलवाएं. साफ पानी पिएं, बच्चों के नाखून नहीं बढ़ने दें. और गर्मियों के मौसम में धूप में सीधा खेलने से मना करें.
But on the other side,bukhare health k liye ache bhi hote h
Yee bukharo m zahr bhi daalte h taaki vo bikul fresh lge or asani k koi bhi unko kharid Lee isliyee Desi fal Khao naaki Jo bas dekhne m ache ho
Near my house one child also suffer from fever coz of eating unhealthy fruits we should be aware of these inside and outer parts as well