बीती रात देशवासियों के लिए वह ऐतिहासिक पल बनने वाला था जब देश के चाँद मिशन की खूबसूरत तस्वीरों का लाइव नज़ारा हर कोई देखता। टकटकी लगाए पूरे भारत की नज़रें चाँद पर भारत के कदमों को देखने के लिए बेताब थी।

वहीं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी खुद भारत के स्पेश एजेंसी इसरो के बैंगलोर स्थित सेंटर में पहुँच इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने वाले थे। लगभग डेढ़ महिने पहले अपने बेहद रोमांचक सफर की ओर निकल पड़े चंद्रयान 2 सफलता पूर्वक हर पड़ाव पार कर रहा था।

लेकिन चांद पर जैसे ही विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिग में मात्र 2.1 किलोमीटर की दूरी रह गयी थी, अचानक एक मायूसी की लहर इसरो के सेंटर में छा गयी। प्रधानमंत्री मोदी भी सेंटर में मौजूद वैज्ञानिकों के मायूस चेहरों की ओर टकटकी लगाए देखने लगे।

दरअसल रात 1 बजकर 37 मिनट का यह वह कठिन समय था जब अचानकर विक्रम लैंडर से इसरो का संपर्क टूट गया। पूरे देश की निगाहें इसरो के मिशन चंद्रयान 2 की सफलता की ओर थी, लेकिन तभी यह ऐतिहासिक पल निराशा की घनघोर बादलों से घिर गया। रात 2 बजकर 15 मिनट तक कोई स्तिथि साफ ना हो पायी।
This is Mission Control Centre. #VikramLander descent was as planned and normal performance was observed up to an altitude of 2.1 km. Subsequently, communication from Lander to the ground stations was lost. Data is being analyzed.#ISRO
— ISRO (@isro) September 6, 2019
रात 3 बजे इसरो के ट्वीटर अकाउंट पर यह जानकारी सार्वजनिक कर दी गयी कि विक्रम लैंडर से संपर्क टूट जाने से मिशन सफल ना रह पाया। विक्रम लैंडर से संपर्क टूटने के कारणों का इसरो द्वारा पता लगाया जा रहा है। यानि यह बात साफ ना हो पायी कि आखिरी के 15 मिनट में विक्रम लैंडर क्रैश हो गया है या राह भटक गया है।

इसरो का यह मून मिशन भले ही अपना आखिरी पड़ाव पूरा ना कर पाया हो लेकिन पूरा भारत आज इसरो के तारीफों के पुलिंदों को बाँधते नहीं थक रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने इसरो के वैज्ञानिकों का हौंसला बढ़ाया।
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उन्होंने इसे असफल प्रयास ना मानते हुए बड़ी सफलता का महत्वपूर्ण कदम माना। भारत के चंद्र्यान 2 मून मिशन से जुड़ी एक अच्छी खबर अभी भी यह है कि मिशन का ऑर्बिटर अभी भी चांद की कक्षा में मौजूद अपना कार्य कर रहा है।

तय मिशन के तहत ऑर्बिटर इसरो को लगातार चांद से जुड़ी कुछ रोचक तस्वीरों को भेजता रहेगा। जिसे इस मिशन में कुछ रोचक चाँद से जुड़े रोचक तथ्य सामने आऐंगे। इस कठिन समय में इसरो को हौंसलों को बुलंद करने हेतू प्रधानमंत्री मोदी आज सुबह 8 बजे देश के जाबांज वैज्ञानिकों को संबोधित किया।
मोदी भी मानते हैं कि ज्ञान की नई राह विज्ञान होती है। विज्ञान में असफलता कुछ नहीं होती बल्कि सफलता के लिए लगातार प्रयास होते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने वैज्ञानिकों की प्रतिभा को सराहा उन्होंने इसरो चीफ के. शिवन की पीठ भी थपथपाई। लंबे इंतज़ार की इस घड़ी ने इसरो चीफ के शिवन के आँखें भी नम कर दीं थी।
मोदी ने उन्हें गले लगाया औऱ यह भी एक ऐतिहासिक पल सदा के लिए बन गया है। देश को निश्चित ही अपने वैज्ञानिकों की प्रतिभा पर एक अटूट विश्वास है जो कि सफलता के कदम चूमने तक बना ही रहेगा। गौरतलब है कि भारत का यह मून मिशन चांद के दक्षिणी धूव्र पर पहुँचने का था, जहाँ विश्व भर में भारत ही पहला देश होता जो अपना झंडा चाँद के इस हिस्से में फहरा पाता।