गुजरात में अब भाजपा सरकार में कोई नेतृत्व परिवर्तन नहीं होगा और न ही मंत्रिमंडल में विस्तार की कोई संभावना नहीं है। गुजरात भाजपा और राज्य सरकार विधानसभा को जल्द भंग करने के मूड में हैं। भाजपा सूत्रों के अनुसार यूपी में आगामी चुनाव के साथ ही गुजरात में भी चुनाव हो सकते हैं। इसे देखते हुए गुजरात में फरवरी-मार्च में विधानसभा चुनाव समय से 7 या 8 महीने पहले हो सकते हैं।
इसके लिए राजनीतिक कारण से लेकर पार्टी के अंदरूनी वजहों को भी जिम्मेदार माना जा रहा है। इसके अलावा अगर उत्तर प्रदेश में भाजपा के नतीजे अच्छे नहीं रहे तो गुजरात पर भी असर पड़ सकता है। भाजपा फिलहाल जिस तरह से चुनाव की तैयारी कर रही है, उसके मुताबिक छह महीने बाद चुनाव की घोषणा हो सकती है। वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के 7 सांसदों को कैबिनेट में मंत्री बनाया है। यह जाति-लिंग समीकरणों को निर्धारित करता है। केंद्र में विस्तार न हुआ होता तो नेतृत्व में परिवर्तन हो जाता। लेकिन, अगर ऐसा नहीं होगा।
सबसे बड़ा डर है आप, इसलिए नहीं देना चाहते हैं ज्यादा वक्त
जल्दी चुनाव कराने के पीछे बीजेपी का सबसे बड़ा डर आम आदमी पार्टी है। वर्तमान में गुजरात में सत्ता के गलियारे में सूरत महानगरपालिका से आप ने पहल की है। बीजेपी जल्दी चुनाव चाहती है, क्योंकि अगर ज्यादा समय मिलेगा तो आप मजबूत हो सकती है। अगर जल्दी चुनाव हुए तो उनके पास समय नहीं होगा।