हर महीने कृष्ण पक्ष के चौथे दिन संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है । इस दिन भगवान गणेश जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है।इस महीने 23 नवंबर, मंगलवार को संकष्टी चतुर्थी व्रत किया जायेगा, इस दिन अगर विधि विधान से भगवान गणेश जी की पूजा की जाये तो जीवन में आ रही सभी बाधायें दूर होती हैं।
तो चलिये जान लेते हैं, कि संकष्टी चतुर्थी के दिन आपको किस तरह भगवान गणेश की पूजा करनी चाहिये ताकि आप पर भी बरसे बप्पा की कृपा।
संकष्टी चतुर्थी का महत्व
संस्कृत भाषा में संकष्टी का अर्थ संकट या बाधा हरना होता है, इसलिए संकष्टी चतुर्थी को विशेष माना जाता है। इस दिन गणेश जी की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में खुशहाली का वास होता है। यदि आपके जीवन में भी कोई परेशानी है तो संकष्टी चतुर्थी के दिन गणेश जी की पूजा करने से सभी परेशानियां और बाधाएं दूर होती हैं।
पूजा विधि
इस दिन सुबह जल्दी उठकर नहाकर व्रत का संकल्प करें, इसके बाद मंदिर में गणेश जी की पूजा कर उन्हें जल चढ़ायें और उनके सामने धूप,दीप जलायें। ध्यान रखें कि संकष्टी चतुर्थी के दिन किसी भी रूप में चावल, गेहूं या दाल का सेवन करने से बचें।
शाम को दूर्वा घास, फूल, अगरबत्ती और दीपक से भगवान गणेश जी की पूजा करें, इसके बाद गणेश जी आरती करें और उन्हें लड्डू का भोग लगायें। इसके बाद शाम को चांद को अर्घ्य देकर व्रत खोलें।