एसिड अटैक सर्वाइवर के दर्द को महसूस कराती ‘छपाक’

फिल्म ‘छपाक’ तेजाब की गैर कानूनी बिक्री को लेकर कई सारे सवाल खड़े करती है, सोचने पर मजबूर करती है कि तेजाब की बिक्री पर सख्त कानून बनाने की जरुरत है।  हमले का शिकार हुई लड़की की जिंदगी किस कदर बदल जाती है, उसे अपने जीवन में कितना संघर्ष करना पड़ता है। शायद ही कोई इसे गहराई से समझ सकता हो। मेघना गुलजार ने इस विषय को लोगों तक पहुंचाने का अच्छा प्रयास किया है तो चलिये जानते हैं कि इस फिल्म को क्यों देखें।

कलाकार- दीपीका पादुकोण, विक्रांत मैसी, अंकित बिष्ट,

निर्देशक-  मेघन गुलजार

फ़िल्म- ड्रामा

रेटिंग- 3

Image result for chapak"

फिल्म की कहानी- अपनी जिंदगी की जरुरतों से लड़ती मालती (दीपिका पादुकोण) में एसिड अटैक के बाद भी बहुत कुछ करने का जज्बा बाकी है, वो एक अच्छी नौकरी की तलाश में है। लेकिन उसे कोई भी मौका देने को तैयार नहीं क्योंकि उसका चेहरा   एसिड अटैक से झुलसा हुआ है। ऐसे में उसकी मुलाकात अमोल ( विक्रांत मेसी) से होती है जो पत्रकारिता छोड़ समाज सेवक बन चुका है। और अपना एनजीओ चलाता है।  अमोल  का एनजीओ एसिड अटैक से पीड़िताओं का इलाज कराती है मालती भी अमोल के साथ मिलकर इस एनजीओ से जुड़ जाती है। वो तेज़ाब बैन कराने के लिये मांग करती है।

Image result for chapak"

अभिनय – मालती के किरदार को  दीपिका पादुकोण ने बखूबी निभाय है। दीपिका को देखकर आपको मालती की छवि ही नजर आयेगी, उनके शरीर की बनावट से लेकर हंसी सबकुछ मालती से मिलता है, ये कहना गलत नहीं होगा कि मेघना गुलजार ने दीपिका पादुकोण को इस फिल्म में लेकर कोई गलती नहीं की। वहीं अगर बात करें विक्रांत मेसी की तो उन्होंने भी अपने किरदार में जान फूंकी है। उनके चेहरे पर अपने किरदार का दर्द साफ दिखाई देता है।

Image result for chapak"

निर्देशन- छपाक में मेघना गुलजार ने कोशिश की है कि लोग एसिड अटैक के दर्द को समझ सकें, उन्होंने एसिड अटैक सर्वाइवर के दर्द को बेहद ही अच्छे ढ़ग से पर्दे पर उतारा है, फ़िल्म का गाना छपाक से पहचान ले गया एसिड पीडिता के दर्द को बयां करता है, जहां आप खुद को भावुक होने से नहीं रोक पायेंगे।

संगीत- फिल्म में संगीत शंकर –एहसान –लॉय ने दिया है। फिल्म में दो ही गानें है,  छपाक गाना आपको फ़िल्म की कहानी को महसूस करने पर मजबूर करता है।

Image result for chapak movie"

क्यों देखें-  एसिड हमले पर बनीं फ़िल्म “छपाक” समाज की सच्चाई को दिखाती है, इस विषय पर गंभीरता से सोचने पर मजबूर करती है की एसिड की बिक्री पर सख्त कानून बनें ताकि ऐसे हादसे दोहराये ना जायें । तो आप भी एसिड सर्वाइवर के दर्द और जीवन के संघर्षों  को करीब से महसूस करना चाहते हैं तो इस फिल्म को देखने जा सकते है।

4 Comments

Comments are closed.