हिस्टॉरिकल फिल्म पानीपत के बाद निर्देशक ओम राउत “तानाजी द अनसंग वारियर” पर्दे पर लेकर आये हैं। पानीपत के बाद तानाजी एक और ऐसी ऐतिहासिक फिल्म है, जो मराठा साम्राज्य की शूरवीरता को दिखाने का काम कर रही है। इस कहानी में जांबाजी, रोमांस, थ्रिल, विश्वासघात जैसे सारे एलिमेंट्स हैं और उस पर सोने पर सुहागा कहलाने वाला 3 डी इफेक्ट्स जो पूरी फिल्म को शुरू से आखिर तक आपको फिल्म की कहानी के साथ बांधकर रखता है।
कलाकार – अजय देवगन,सैफ अली खान,काजोल,शरद केलकर,नेहा शर्मा,पद्मावती राव,शशांक शेंडेट
निर्देशक – ओम राउत
फिल्म- , हिस्टॉरिकल ड्रामा
समय- 2 घंटा 15 मिनट
रेटिंग- 3.5 / 5
फिल्म की कहानी — इतिहास के उस पन्ने की है, जहां औरंगजेब (ल्यूक केनी) पूरे हिंदुस्तान पर मुगलिया परचम को लहराने की रणनीति बना रहा है और दक्खन (दक्षिण) शिवाजी महाराज (शरद केलकर) अपने स्वराज्य को लेकर ली गई कसम को पूरा करने का सपना देख रहा है। इतिहास में इस युद्ध को सिंहगढ़ के युद्ध के नाम से जाना जाता है। जो कि 4 फरवरी 1670 को हुआ था। शिवाजी महाराज का परममित्र और जांबाज योद्धा सूबेदार तानाजी मालसुरे (अजय देवगन) अपनी पत्नी सावित्रीबाई (काजोल) के साथ अपने बेटे की शादी की तयारियों में लगा हुआ हैं। वो इस बात से अंजान है कि पुरंदर संधि में कोंडाणा किले समेत 23 किलों को मुगलों के हवाले कर देने के बावजूद मुगलिया सल्तनत की शांत नहीं बैठा है। राजमाता जीजाबाई ने कोंडाणा का किला मुगलों के हवाले किया था, उसी वक्त उन्होंने शपथ ली थी कि जब तक इस किले पर दोबारा भगवा नहीं लहराएगा, तब तक वो पैरों में पादुका नहीं पहनेंगी। औरंगजेब अपने खास, विश्वासपात्र उदयभान राठोड (सैफ अली) को भारी-भरकम सेना और नागिन नामक एक बड़ी तोप के साथ कोंडाणा किले की और बढ़ने का करने का आदेश देकर मराठा साम्राज्य का खात्मा करने का मन बना चुका है। आगे कि कहानी जानने के लिये आपको सिनेमाघर का रुख करना पड़ेगा।
अभिनय – बात की जाये अजय देवगन के किरदार की तो जांबाज योद्धा के रूप में अजय देवगन ने बेहतरीन प्रर्दशन किया है, वो हर बार की तरह इस बार भी अपनी अदाकारी से अपने फैंस का दिल जीतते नजर आये। काजोल के साथ उनकी केमेस्ट्री भी लाजबाब दिखी। वहीं दूसरी और उदयभान राठौड की भूमिका निभानते दिखे सैफ अली खान ने भी अपने किरदार को निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनका खलनायक का किरदार दर्शकों को फिल्म के बीच-बीच में हंसाने का काम करता है। काजोल ने भी अपने किरदार को निभाने का प्रयास किया है। अजय- देवगन और काजोल काफी लंबे समय के बाद एक साथ दिखायी दिये जो उनके फैस के लिये सोने पर सुहागा का काम करेगा। वहीं अगर बात की जाये शिवाजी का किरदार निभाते हुए दिखे शरद केलकर की तो उनका भी फिल्म के किरदारों में अहम भूमिका रही है।
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संगीत – सचेत परंपरा, अजय-अतुल और मेहुल व्यास जैसे संगीतकारों की मौजूदगी में ‘शंकरा रे शंकरा’, ‘माय भवानी’ और ‘घमंड कर’ जैसे गाने भी आपको पसंद आयेंगे।
क्यों देखें- अगर आपको भी ऐतिहासिक फिल्में देखने पसंद है, तो बिना सोचे समझे अपने परिवार के साथ इस फिल्म का 3 डी में लुफ्त उठा सकते हैं।