हिंदू धर्म में पुराने समय से चले आ रहे तीज-त्यौहारों का विशेष महत्व हमेशा से रहा है। इसी क्रम श्राद्ध का भी पितृ पक्षों को खुश करने में विशेष महत्व माना जाता है। इस समय श्राद्ध चल रहे हैं।
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श्राद्ध के समय को अत्यंत शुभ तो नहीं माना जाता लेकिन इसे पूरी तरह अशुभ कहना भी गलत होगा। दिवगंत आत्माओं की पुण्यतिथी व उनकी आत्मा की शांति के लिए भोग आदि का कार्य इन दिनों किया जाता है।

परिवार में पितृ पक्ष की असीम कृपा की दृष्टि से पितृ पक्ष को खुश करना आवश्यक समझा जाता है। परिवार की खुशहाली औऱ एकता के लिए श्राद्ध के दिनों में पितृजनों का आवह्न का विशेष महत्व रहा है।

वहीं हिंदू धर्म में मान्यता है कि यदि कुंडली में पितृ दोष आ जाए तो पारिवारिक समस्याऐं बढ़ने लगती हैं। इन्हीं दोषों का निवारण करने के लिए श्राद्ध के दिनों का महत्व बड़ा माना जाता है।

श्राद्ध के दिनों में यह धारण हिंदू धर्म में है कि इन दिनों ना ही नए वस्त्र खरीदे जाने चाहिए ना ही पहने जाने चाहिए। इसके साथ ही जन्मदिन इत्यादि शुभ दिनों का भी विशेष जश्न इस दिनों मनाना उचित नहीं समझा जाता। श्राद्ध का मूल भाव श्रद्धा से ही माना जाना चाहिए। केवल कर्मकांड और धार्मिक महत्व के उद्देश्य ही नहीं बल्कि पुरखों की खुश करने के लिए श्राद्ध हर साल आते हैं।

इस वर्ष पितृ पूजन का सर्वोत्तम समय भाद्रपद की पूर्णिमा से आश्विन की अमावस्या तक का है। यह 16 दिनों का समय पितृ पूजन के लिए विशेष महत्व का रहने वाला है।

माना जाता है कि श्राद्ध के दिनों में दान का भी महत्व बढ़ जाता है।

श्राद्ध के दिनों में दिन के आठवें मुहूर्त से एक विशेष तथ्य भी जुड़ता है। मान्यता है कि मध्यकाल में साढ़े 11 से साढ़े 12 तक के समय में आठ चीजों का एक साथ होना शुभ है। यह आठ चीजें हैं- मध्याह काल, शुद्ध पात्र, कंबल, चांदी, कुशा, तिल, गौ माता और कन्या का पुत्र। ब्रह्मापुराण में श्राद्ध के बारे में लिखा गया है कि –अपने पुरखों को लक्ष्य करके जो दिया जाता है, वह श्राद्ध कहलाता है।

पूर्वजों की शांति के लिए श्राद्ध के इन दिनों में कौवे को भोजन खिलाना भी शुभ माना जाता है। इसके पीछे भी धार्मिक मान्यता है कि पितृ पक्ष कौवे के रूप में धरती में इन दिनों प्रवेश करते हैं। मृत पूर्वजों की शांति के लिए उन्हें भोजन से तृप्त किया जाता है। इस दृष्टि से कौवों को भी विशेष भोग ही लगाया जाना चाहिए।

घी लगी रोटी व खीर से कौवे को भोग लगाया जा सकता है। इसके अलावा कच्चे चावल के दाने भी घर की मुंडेर पर बैठे कौवे को खिलाए जा सकते हैं। माना जाता है कि यदि कौवे द्वारा आपका भोग स्वीकार कर लिया जाता है तो यह पितृ पक्षों की संतुष्टि का संकेत होता है।

इसके अलावा बताते चलें कि श्राद्ध का विशेष महत्व मानते हुए इन दिनों सात्विक भोजन को ही घर मे पकाना चाहिए। श्राद्ध के इस अनोखे महत्व वाले पर्व का प्रयोग सामाजिक क्रियाकलापों में संलिप्त होते हुए दान आदि के लिए उचित समझा जाना चाहिए।