शारदीय नवरात्री की आज अष्टमी तिथी है। आज माँ दुर्गा के आठवें स्वरूप माता महागौरी का पूजन किया जाएगा। माता महागौरी के विषय में माना जाता है कि माता का यह स्वरूप अत्यंत दिव्यमयी व सौम्य है।

सादगी में श्वेत वस्त्र धारिणी यह माता भक्तों को विवाह संबंधी विपत्तियों को दूर करती है। माता की सच्चे मन से अर्चना- पूजा जीवन में आ रही सभी कठिनाईयों का भी अंत करता है।

परम कल्याणकारी यह माता ममता का स्वरूप है। वैवाहिक जीवन में आ रही विपत्तियों को भी माता के आशीर्वाद से दूर किया जा सकता है।
श्वेत स्वरूप दिव्यमयी माता है महागौरी
माता महागौरी को सुंदर रूप वाली देवी कहा जाता है। पौराणिक कहानियों के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव शंकर को पति के रूप में पाने के लिए कई वर्षों तक जप-तप किय़े थे।

इस कठोर जप तप में माता ने एक ही मुद्रा में बैठे भगवान शिव का लगातार जाप किया था। इस कठोर तपस्या में माता ने ना सिर्फ अन्न-जल का त्याग किया बल्कि कई यातनाऐं भी सहीं। पार्वती माता का शरीर कभी तेज धूप में जला तो कभी तेज आँधी तूफान बारिश में भीगा।

भगवान शिव को पाने के लिए माता की यह तपस्या इतनी कठोर थी कि माता ने अपने सुंदर स्वरूप ही खो दिया था। कठोर यातनाओं से माता का शरीर काला पड़ गया था।

माता की तपस्या से प्रसन्न होकर जब उनकी भेंट भगवान शिव से हुई तो भगवान ने उन्हें स्वीकार कर लिया। भगवान शिव ने माता के रूप को संवारने के लिए उनका गंगाजल से स्नान करवाया।

शिव द्वारा गंगाजल से स्नान के पश्चात् माता का यह दिव्यमयी स्वरूप उभरा। श्वेत सुंदरी माता का नाम ही महागौरी पड़ा।
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माना जाता है माता का यह स्वरूप मनचाहे वर का भी आशीर्वाद देती हैं। माता सीता ने भगवान राम को अपने वर के रूप में पाने के लिए माता के इस दिव्यमयी स्वरूप महागौरी का पूजन किया था।
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माता महागौरी के पूजन से ही माता सीता को अयोध्यापति राम वर के रूप में मिले थे।
करूणामयी माता का स्वरूप
श्वेत स्वरूप माता का रूप गोरा है। उपमा, शंख, चंद्र, कुंद के फूल से माँ का रूप सजता है। माता के समस्त वस्त्र व आभूषण श्वेत हैं। माँ महागौरी की चार भुजाऐं हैं।

दाहिने हाथों में अभय मुद्रा व त्रिशूल सजता है, वहीं माता बांये हाथों में डमरू व वर-मुद्रा धारण किये हुए है। माता का वाहन श्वेत बैल है। करूणामयी माता का रूप अत्यंत सौम्य व आकर्षक है।
ममतामयी माता महागौरी की पूजन विधी

श्वेत सुंदरी माता महागौरी का पूजन करने के लिए स्नान कर व साफ वस्त्र धारण कर माता के मंत्र का जाप करें। आज के दिन माता के पूजन के लिए पीले वस्त्र ही धारण करें। माता के मूर्ती के समक्ष घी का दीपक जलाएं।

माँ के इस स्वरूप को पीले या श्वेत फूल ही अर्पित करें। दामपत्य जीवन की खुशहाली के लिए सुहागन स्त्रियाँ माता के इस दिव्यमयी स्वरूप को चुनरी जरूर अर्पित करें। पवित्र मन से माता की स्तुति कर माता का पूजन करें। माता की आरती के पश्चात् माता को लगाए भोग का प्रसाद वितरण करें।