बीजेपी प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा की उम्मीदवारी पर मंडराए खतरे के बादल

लोकसभा चुनाव 2019 में आए दिन कुछ अलग, कुछ नए लोग, नय़ी बातें जनता के समक्ष आ रही हैं जिनके बाद जनता का फैसला असल मायनों में अपनी सरकार चुनने के लिए महत्वपूर्ण होगा। अभी हाल ही में साध्वी प्रज्ञा सिंह के बीजेपी में सामिल होने की खबरे आई थी।

गौरतलब है कि साध्वी प्रज्ञा को बीजेपी की ओर से मध्यप्रदेश भोपाल से चुनावी मैदान में उतरने का टिकट मिला है। यहाँ उनके समक्ष कांग्रेस के दिग्गविजय सिंह चुनावी मैदान में उनके विपक्षी के रूप में होंगे।

कुछ समय पूर्व साध्वी प्रज्ञा के कुछ विवादित बयान  महाराष्ट्र के पूर्व एटीएस प्रमुख शहीद हेमंत करकरे, और बाबरी मस्ज़िद के विषय में आए थे। जिसके बाद चुनाव आयोग के निर्देशनुसार प्रज्ञा पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। अब खबर आ रही है कि बीजेपी प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा की उम्मीदवारी खतरे में नज़र आ सकती है। इसलिए बीजेपी की ओर एक नए प्रत्याशी सांसद संजर ने अपने नाम का नामांकन पर्चा डमी प्रत्याशी के रूप में भर दिया है।

डमी प्रत्याशी से अभिप्राय ऐसे प्रत्याशी से होता है, जिसे मुख्य प्रत्याशी के स्थान पर विकल्प के तौर पर ऱखा जाता है। यानि इस बात की पूर्ण संभावना है कि साध्वी प्रज्ञा की उम्मीदवारी निर्वाचन आयोग अमान्य घोषित कर सकता है।

बता दें बीजेपी जहाँ इस बार के लोकसभा चुनाव मोदी के नाम पर वोटों के आने की उम्मीद में है, वहीं एक आरोपी को पार्टी का टिकट दिए जाने पर बीजेप कट्घरे में खड़ी नज़र आ रही है। पार्टी की यह उम्मीदार भले ही पार्टी के लिए नयी हो पर देश की जनता के लिए साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का नाम बिल्कुल भी नया नहीं है। गौरतलब है कि मालेगांव बम ब्लास्ट की आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर जेल में रह कर आई हैं। लेकिन उनका संबंध हिंदुत्व से पहले से ही रहा है।

याद दिला दें कि 2014 के एक भाषण में मोदी ने खुद मंच से कहा था कि वे में किसी गुनाह में संलिप्त व्यक्ति को राजनीतिक पार्टी का सदस्य नहीं बनाऐंगे, इसमें वे भाजपा को भी नहीं छोड़ेंगे कि बात कही थी। वहीं अब मालेगांव ब्लास्ट की आरोपी साध्वी को पार्टी का टिकट देने पर बीजेपी आरोपों से घिरती नज़र आ रही है। बीजेपी का साध्वी के बचाव में कहना है कि साध्वी को झूठे केस में फंसाया गया था।

बात केवल यहाँ साध्वी प्रज्ञा पर लगे आरोपों की नहीं है, बात दरअसल यह है कि किसी भी राजनीतिक पार्टी को इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए कि उसे किसी भी ऐसे व्यक्ति को टिकट नहीं देना चाहिए जिस पर आरोप भी लगा हो। आखिरकार जनता का भविष्य किसी आरोपी के आरोप से बरी होने या उसके क्रिमिनल साबित होने के फैसले पर तो नहीं टिक सकता।