
पल पल बदलता ,रहता है वक्त,
ये तो सभी को पता था ।
पर पलक झपकते ,बदल जाएगा इतना सब, ऐसा किसी ने कब, कहाँ सोचा था ?
हो गयी देखो अब ,आसमान सी ये धरा ,
सूनी हैं सड़कें ,और घरों में खुशियों का रंग जमा ।
बदल सा गया मौसम, हवाओं में शुद्धता,
इन्सान है पिंजरे में ,और पशु बेखौफ़ घूम रहा ।
अब दिन में भी सुन रहे , पक्षियों का चहकना,
क्योंकि रास्तों पर कहीं ,जाम नहीं लग रहा।
बच्चों की तो , हो गयी मौज देखो ,
दिनभर मस्ती ही मस्ती ,किताबों से पल्ला छूटा ।
और तो और , माँ के साथ साथ अब ,
पापा की गोद में भी ,सोने को मिल रहा ।
यूँ तो जो भी बदलाव हुआ ,सब अच्छा लग रहा
पर इसी के साथ बदल जाये ,इन्सान इन्सान में ,
बस तो फिर आगे क्या कहना …….
✍🏻पूनम (दीवा)
Bahut Khoob… Shandar… lajabab 💕