ख़ुशी हासिल नहीं है अब ख़ुशी में – किशन स्वरूप
ग़ज़ल ख़ुशी हासिल नहीं है अब ख़ुशी में , न जाने क्या हुआ है ज़िन्दगी में । बहुत कम उम्र आयी काम मेरे, ज़ियादातर गुज़ारी [Read More]
ग़ज़ल ख़ुशी हासिल नहीं है अब ख़ुशी में , न जाने क्या हुआ है ज़िन्दगी में । बहुत कम उम्र आयी काम मेरे, ज़ियादातर गुज़ारी [Read More]
देश हित में समर्पित एक ग़ज़ल इंसानियत ज़िंदा रहे इंसानियत से प्यार हो क्यों नफरतों की आग से इंसानियत की हार हो स्वाधीनता का पर्व [Read More]
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