ग़ज़लों का सुहाना सफर
ग़ज़ल हमारे प्यार का परचम तेरे दिल पे नहीं फहरा जहाँ चाहा चमन हमने वहीं पे हो गया सहरा गला मैं फाड़ कर रोया सुना [Read More]
ग़ज़ल हमारे प्यार का परचम तेरे दिल पे नहीं फहरा जहाँ चाहा चमन हमने वहीं पे हो गया सहरा गला मैं फाड़ कर रोया सुना [Read More]
देश हित में समर्पित एक ग़ज़ल इंसानियत ज़िंदा रहे इंसानियत से प्यार हो क्यों नफरतों की आग से इंसानियत की हार हो स्वाधीनता का पर्व [Read More]
Copyright © 2026 | WordPress Theme by MH Themes