“याद आता है मुझे वो शहर मेरे बचपन का”
याद आता है मुझे वो शहर मेरे बचपन का जहां लोग अपने से रहा करते थेजब मिलते थे मुझसे तब अपनी सी बात किया करते [Read More]
याद आता है मुझे वो शहर मेरे बचपन का जहां लोग अपने से रहा करते थेजब मिलते थे मुझसे तब अपनी सी बात किया करते [Read More]
मेरे मोहब्बत करने का ये अंजाम लिख देना तुम,अपनी तमाम मुश्किलात मेरे नाम लिख देना तुम।बहुत ज़ुल्म किया है तुम पे समाज और रिवाज़ ने,तुम्हारे [Read More]
वो बुढ़िया कल भी अकेली थी वो बुढ़िया अब भी अकेली है चेहरे की झुर्रियाँ पढ़ कर पता चलता हैउसने कितने सदियों की पीड़ा झेली [Read More]
बड़े-बड़े कुछ लोग यहाँ, निर्धन को नोंच के खाते हैं। कर भण्डारे बड़े-बड़े फिर परोपकार बतलाते हैं। स्त्री जाति को नित ही जो, छींटाकशी करके [Read More]
ग़ज़ल हमारे प्यार का परचम तेरे दिल पे नहीं फहरा जहाँ चाहा चमन हमने वहीं पे हो गया सहरा गला मैं फाड़ कर रोया सुना [Read More]
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