लिख देना तुम

November 22, 2020 Kalpana Chauhan 1

मेरे मोहब्बत  करने का ये अंजाम लिख देना तुम,अपनी तमाम मुश्किलात मेरे नाम लिख देना तुम।बहुत ज़ुल्म किया है तुम पे समाज और रिवाज़ ने,तुम्हारे [Read More]

वो बुढ़िया

October 18, 2020 Kalpana Chauhan 0

वो बुढ़िया कल भी अकेली थी वो बुढ़िया अब भी अकेली है चेहरे की झुर्रियाँ पढ़ कर पता चलता हैउसने कितने सदियों की पीड़ा झेली [Read More]

‘सच्चा परोपकार’

September 12, 2020 Kalpana Chauhan 0

बड़े-बड़े कुछ लोग यहाँ, निर्धन को नोंच के खाते हैं। कर भण्डारे बड़े-बड़े फिर परोपकार बतलाते हैं। स्त्री जाति को नित ही जो, छींटाकशी करके [Read More]

ग़ज़लों का सुहाना सफर

September 6, 2020 Kalpana Chauhan 6

ग़ज़ल हमारे  प्यार  का  परचम  तेरे  दिल  पे  नहीं  फहरा जहाँ  चाहा  चमन  हमने  वहीं  पे  हो  गया   सहरा गला  मैं  फाड़  कर  रोया सुना  [Read More]