‘सच्चा परोपकार’

September 12, 2020 Kalpana Chauhan 0

बड़े-बड़े कुछ लोग यहाँ, निर्धन को नोंच के खाते हैं। कर भण्डारे बड़े-बड़े फिर परोपकार बतलाते हैं। स्त्री जाति को नित ही जो, छींटाकशी करके [Read More]

ग़ज़लों का सुहाना सफर

September 6, 2020 Kalpana Chauhan 6

ग़ज़ल हमारे  प्यार  का  परचम  तेरे  दिल  पे  नहीं  फहरा जहाँ  चाहा  चमन  हमने  वहीं  पे  हो  गया   सहरा गला  मैं  फाड़  कर  रोया सुना  [Read More]