शीला दीक्षित भारतीय सियासती जंग का एक ऐसा नाम जिसने राजनीति में रहकर इसके मायनों को ही बदल दिया। भारतीय जनता के बीच अपनी एक विशेष पहचान अपने काम से बनाने वाली शीला दीक्षित आज भारतीय राजनीति का ऐसा नाम बन गया है जो ठीक 24 घंटों पहले तो राजनीति की जंग का एक अहम हिस्सा था पर अब वह केवल यादों में ही याद किया जाएगा।
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एक पल के लिए यह समाचार सुनने वाले को अवाक् कर देता है कि राजधानी दिल्ली में 15 साल तक अपनी विशेष पहचान बनाए रखने वाली राजधानी की पूर्व मुख्यमंत्री हम सब के बीच नहीं रही। 81 वर्षीय शीला दीक्षित की पहचान केवल दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर नहीं की जा सकती।
Deeply saddened by the demise of Sheila Dikshit Ji. Blessed with a warm and affable personality, she made a noteworthy contribution to Delhi’s development. Condolences to her family and supporters. Om Shanti. pic.twitter.com/jERrvJlQ4X
— Narendra Modi (@narendramodi) July 20, 2019
वह राजनीति का एक ऐसा चेहरा मानी जाऐंगी जिनका नाम इतिहास के पन्नों पर भारतीय दिग्गज नेताओं की सूची में सदा के लिए अमिट स्याही से दर्ज़ हो जाएगा। गौरतलब है कि कांग्रेस की वरिष्ठ व दिल्ली में कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर नियुक्त शीला दीक्षित ने बीते शनिवार अपनी आखिरी सांसे लीं।
BJP MP & BJP Delhi President, Manoj Tiwari: I had met her recently, it is a big shock. I remember how she welcomed me like a mother. Delhi will miss her. May God give her family and her closed ones the strength to bear this loss. #sheiladixit pic.twitter.com/nqOmU2lQ0I
— ANI (@ANI) July 20, 2019
भारतीय राजनीति की एक प्रखर नेता जिसे कि विपक्ष के नेता भी आशीर्वाद हेतू माँ का विशेष दर्जा देते थे, कल शाम 3:55 पर दिल के दूसरे दोरे से भारतीय राजनीति को सदैव के लिए अलविदा कह गयीं। माना जा रहा था कि दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री रह चुकी इस प्रखर नेता की तबीयत पिछले कुछ समय से खराब चल रही थी। लेकिन यह शीला दीक्षित की अकल्पनीय शक्ति का ही परिचय ही मिलता है कि जीवन के आखिरी दिनों में भी वह राजनीति में सक्रिय रूप से शामिल रहीं।
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और एक वरिष्ठ राजनेता श्रीमती शीला दीक्षित के निधन के बारे में जानकर दुख हुआ। उनका कार्यकाल राजधानी दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण परिवर्तन का दौर था जिसके लिए उन्हें याद किया जाएगा। उनके परिवार व सहयोगियों के प्रति मेरी शोक-संवेदनाएं — राष्ट्रपति कोविन्द
— President of India (@rashtrapatibhvn) July 20, 2019
यह पिछले कुछ समय की ही बात है जब देश में हर-हर मोदी के डंके के भय से विपक्ष ने शीला दीक्षित का नाम समक्ष रख राजनीति की सियासती जंग का एक बड़ा दाँव खेला था। राजधानी दिल्ली की उत्तर-पूर्वी सीट से बीजेपी की ओर से मनोज़ तिवारी के समक्ष विपक्ष की ओर से शीला दीक्षित एक बड़ा नाम कांग्रेस की ओर से लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान रहा।

हालांकि दिल्ली में सभी सीटों पर जीत तो बीजेपी की ही हुई लेकिन शीला दीक्षित की मौजूदगी से एक पल के लिए ही विपक्षी पार्टी का विश्वास ज़रूर डगमगाया था। स्वयं दिल्ली की उत्तर-पूर्वी सीट से विजेता रहे बीजेपी नेता मनोज तिवारी ने यह बात स्वीकारी थी, जीत के बाद वे माँ समान शीला दीक्षित का आशीर्वाद लेने उनके घर भी पहुंचे थे।
I’m devastated to hear about the passing away of Sheila Dikshit Ji, a beloved daughter of the Congress Party, with whom I shared a close personal bond.
My condolences to her family & the citizens of Delhi, whom she served selflessly as a 3 term CM, in this time of great grief.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) July 20, 2019
शीला दीक्षित का नाम दिल्ली की कायापलट करने और उसे राजधानी के नाम पर संवारने के रूप में विशेष तौर पर लिया जाता है। भले ही देश में आज मोदी सरकार की ही जय-जय कार हो लेकिन अपनी लय पर समय के साथ कमज़ोर पड़ती कांग्रेस में शीला दीक्षित एक ऐसी ताकत विपक्ष के पास थी, जो उनके द्वारा किये गए कार्यों से कांग्रेस की छवि को जनता के बीच बनाए रखती थी।

राजधानी दिल्ली में रैपिड मेट्रो की शुरूआत करने वाली इस महानायिका ने राजनीति के 15 वर्षों में ना सिर्फ यातायात को सुगम बनाने हेतु फ्लाइओवरों का निर्माण करवाया बल्कि प्रदूषण की धुंए में घुटती दिल्ली को हरी-भरी बनाने में भी अपना विशेष योगदान दिया।

पंजाब में जन्मी, उत्तरप्रदेश की बहू ने राजनीति में दिल्ली की मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए जनता के बीच अपनी विशेष पहचान अपने कार्यों से दर्ज़ करवाई थी। भले ही यह दिग्गज नेता हम सब के बीच नहीं रहीं लेकिन निश्चित ही राजधानी में किये गए कार्यों से दिल्ली की इस महानायिका की अमिट छाप भविष्य के पन्नों पर पड़ेगी। शीला दीक्षित केवल एक दिग्गज राजनेता के नाम पर ही नहीं दिल्ली की संवरती सूरत की आधार ‘शीला’ के रूप में भी जन-जन में याद रखी जाऐंगी।

गौरतलब है कि शीला दीक्षित का निधन बीते शनिवार को राजधानी दिल्ली के ही निजी अस्पताल एस्कार्ट्स में हो गया। आज राजधानी के निगमबोध घाट पर दोपहर 2:30 बजे शीला दीक्षित की अंतिम संस्कार की क्रियाऐं परिवार द्वारा संपन्न की जाऐंगी।
RIP
So sad😞