शीला दीक्षितः भारतीय राजनीति में एक अदम्य साहस का परिचय

शीला दीक्षित भारतीय सियासती जंग का एक ऐसा नाम जिसने राजनीति में रहकर इसके मायनों को ही बदल दिया। भारतीय जनता के बीच अपनी एक विशेष पहचान अपने काम से बनाने वाली शीला दीक्षित आज भारतीय राजनीति का ऐसा नाम बन गया है जो ठीक 24 घंटों पहले तो राजनीति की जंग का एक अहम हिस्सा था पर अब वह केवल यादों में ही याद किया जाएगा।

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एक पल के लिए यह समाचार सुनने वाले को अवाक् कर देता है कि राजधानी दिल्ली में 15 साल तक अपनी विशेष पहचान बनाए रखने वाली राजधानी की पूर्व मुख्यमंत्री हम सब के बीच नहीं रही। 81 वर्षीय शीला दीक्षित की पहचान केवल दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर नहीं की जा सकती।

वह राजनीति का एक ऐसा चेहरा मानी जाऐंगी जिनका नाम इतिहास के पन्नों पर भारतीय दिग्गज नेताओं की सूची में सदा के लिए अमिट स्याही से दर्ज़ हो जाएगा। गौरतलब है कि कांग्रेस की वरिष्ठ व दिल्ली में कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर नियुक्त शीला दीक्षित ने बीते शनिवार अपनी आखिरी सांसे लीं।

भारतीय राजनीति की एक प्रखर नेता जिसे कि विपक्ष के नेता भी आशीर्वाद हेतू माँ का विशेष दर्जा देते थे, कल शाम 3:55 पर दिल के दूसरे दोरे से भारतीय राजनीति को सदैव के लिए अलविदा कह गयीं। माना जा रहा था कि दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री रह चुकी इस प्रखर नेता की तबीयत पिछले कुछ समय से खराब चल रही थी। लेकिन यह शीला दीक्षित की अकल्पनीय शक्ति का ही परिचय ही मिलता है कि जीवन के आखिरी दिनों में भी वह राजनीति में सक्रिय रूप से शामिल रहीं।

यह पिछले कुछ समय की ही बात है जब देश में हर-हर मोदी के डंके के भय से विपक्ष ने शीला दीक्षित का नाम समक्ष रख राजनीति की सियासती जंग का एक बड़ा दाँव खेला था। राजधानी दिल्ली की उत्तर-पूर्वी सीट से बीजेपी की ओर से मनोज़ तिवारी के समक्ष विपक्ष की ओर से शीला दीक्षित एक बड़ा नाम कांग्रेस की ओर से लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान रहा।

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हालांकि दिल्ली में सभी सीटों पर जीत तो बीजेपी की ही हुई लेकिन शीला दीक्षित की मौजूदगी से एक पल के लिए ही विपक्षी पार्टी का विश्वास ज़रूर डगमगाया था। स्वयं दिल्ली की उत्तर-पूर्वी सीट से विजेता रहे बीजेपी नेता मनोज तिवारी ने यह बात स्वीकारी थी, जीत के बाद वे माँ समान शीला दीक्षित का आशीर्वाद लेने उनके घर भी पहुंचे थे।

शीला दीक्षित का नाम दिल्ली की कायापलट करने और उसे राजधानी के नाम पर संवारने के रूप में विशेष तौर पर लिया जाता है। भले ही देश में आज मोदी सरकार की ही जय-जय कार हो लेकिन अपनी लय पर समय के साथ कमज़ोर पड़ती कांग्रेस में शीला दीक्षित एक ऐसी ताकत विपक्ष के पास थी, जो उनके द्वारा किये गए कार्यों से कांग्रेस की छवि को जनता के बीच बनाए रखती थी।

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राजधानी दिल्ली में रैपिड मेट्रो की शुरूआत करने वाली इस महानायिका ने राजनीति के 15 वर्षों में ना सिर्फ यातायात को सुगम बनाने हेतु फ्लाइओवरों का निर्माण करवाया बल्कि प्रदूषण की धुंए में घुटती दिल्ली को हरी-भरी बनाने में भी अपना विशेष योगदान दिया।

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पंजाब में जन्मी, उत्तरप्रदेश की बहू ने राजनीति में दिल्ली की मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए जनता के बीच अपनी विशेष पहचान अपने कार्यों से दर्ज़ करवाई थी। भले ही यह दिग्गज नेता हम सब के बीच नहीं रहीं लेकिन निश्चित ही राजधानी में किये गए कार्यों से दिल्ली की इस महानायिका की अमिट छाप भविष्य के पन्नों पर पड़ेगी। शीला दीक्षित केवल एक दिग्गज राजनेता के नाम पर ही नहीं दिल्ली की संवरती सूरत की आधार ‘शीला’ के रूप में भी जन-जन में याद रखी जाऐंगी।

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गौरतलब है कि शीला दीक्षित का निधन बीते शनिवार को राजधानी दिल्ली के ही निजी अस्पताल एस्कार्ट्स में हो गया। आज राजधानी के निगमबोध घाट पर दोपहर 2:30 बजे शीला दीक्षित की अंतिम संस्कार की क्रियाऐं परिवार द्वारा संपन्न की जाऐंगी।

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