आज बुधवार का दिन श्री विनायक जी की पूजा का माना जाता है। जैसा कि आप जानते हैं गज के मुख समान गजानन गणेश को सभी देवों में सर्वप्रथम पूजा जाता है।

वास्तु के अनुसार भी किसी शुभ कार्य की शुरूआत के लिए भी गणेश जी की आरती महत्व सर्वोच्च माना गया है। आपने हनुमान चालीसा, दुर्गा चालीसा या शिव चालीसा के विषय में सुना होगा पर शायद बहुत कम लोगों को ही गणेश चालीसा के विषय में पता होगा।
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बाल स्वरूप में होने के बावजूद भी गणेश भगवान को सभी देवों में सर्वप्रथम पूजे जाने के पीछे गणेश जी में अद्भुत शक्तियों का होना है। क्या आप जानते हैं कि अगर आप गणेश भगवान की पूजा बुधवार के दिन विशेष रूप से करते हैं, तो यह आपके घर की सुख-समृद्धि का घर में वास करता है।

रोज की आरती में गणेश जी की आरती को प्रथम स्थान तो दें ही साथ ही आपको आज बताते हैं कि बुधवार के दिन गणेश भगवान की आरती को विशेष कैसे बनाया जा सकता है।
गणेश जी की पूजा को विधी-विधान से करने के लिए गणेश जी को आमंत्रण दिया जाता है। ठीक प्रकार पूजा के सारे कार्यों को करने के पश्चात् ही गणेश जी को प्रसन्न किया जा सकता है। तो चलिए जानते हैं कि गणेश जी के पूजन के लिए गणेश जी को किस प्रकार आमंत्रित किया जाए-

गणेश पूजन विधीः एक चौकी में साफ-सुथरा लाल रंग का कपड़ा रखें। चौकी के ऊपर गणेश जी की मूर्ती को स्थापित करें। एक पात्र में साबुत चावल के दाने मूर्ती के आगे रखें।

साथ ही घी का दिया, धूपबत्ती, व ताज़े फूलों का पात्र स्थापित करें। रोली व सिंदूर की व्यवस्था भी करें। गणेश जी को मोदक खास पसंद होते हैं। इसलिए मीठे में मोदक रखना ना भूलें। साफ बर्तन में गंगा-जल की भी व्यवस्था करें।

पूजन करने के लिए सबसे पहले घी का दिया व धूप जलाऐं। गणेश जी का हाथ जोड़ते हुए वंदन करें और उन्हें पूजा में पधारने के लिए प्रार्थना करें। उसके बाद शुद्ध गंगा-जल से गणेश जी को स्नान कराएं। मोली के छोटा टुकड़ा गणेश जी की मूर्ती पर माला की भांति सजाऐं। मूर्ती पर सिंदूर का टीका लगाएं। शिव पुराण के अनुसार भी गणेश जी के मस्तिष्क पर तिलक लगाना शुभ माना गया है।

अब गणेश जी को मोदक का भोग लगाएं। गंगा जल का पात्र मूर्ति के समक्ष ही रखें। गणेश जी की मूर्ती पर ताज़े सफेद मोगरा के फूलों की माला को पहनाएं। फूल व दूब चढ़ाएं।

सारे कार्यों को करने के पश्चात् ही गणेश मंत्र से आरती प्रारंभ करें। गणेश जी की चालीसा भी करें। अंततः गणेश जी की आरती गाकर पूजा का समापन करें।

हाथ में फूल व साबूत चावले के दाने लेकर गणेश जी की मूर्ति पर चढ़ाएं और गणेश जी को आपकी विशेष आरती में पधारने का धन्यवाद करें।
बुधवार के दिन गणेश जी की पूजा खास विधी-विधान से करने पर सभी मनोरथ पूरे होते हैं। वास्तु के अनुसार भी इसका खास महत्व माना गया है। खास प्रकार से पूजा करने से गणेश भगवान प्रसन्न तो होते ही हैं, साथ ही घर में कभी दुख व दरिद्रता नहीं आती है।