
जाने माने अभिनेता सौरीश सिंह अठवाल इस अगस्त के महीने में 35 वर्ष के हो चुके हैं। परिवार से दूर और कोरोना के चलते उन्होंने अपना जन्मदिन ना मनाने का फैसला किया। सौरीश सिंह जाने माने टीवी कलाकार हैं जिन्होंने C.I.D, बाल वीर, सावधान इंडिया और कलर्स के सुपरहिट धारावाहिक उड़ान जैसे कई सीरियल्स में अपनी दमदार एक्टिंग से सभी को प्रभावित किया।


उन्हें इसके बाद पहला बड़ा ब्रेक 21 सरफरोश – सारागढ़ी 1897 धारावाहिक सीरियल में मिला जिसमें उन्हें जीवा सिंह का किरदार निभाने का मौका मिला और उसके बाद उन्हें उनकी अच्छी एक्टिंग को ध्यान में रखकर बालाजी प्रोडक्शन (एकता कपूर) के प्रसिद्ध शो “कयामत की रात” में कालासुर के किरदार के लिए ऑफर किया गया जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। यह धारावाहिक तांत्रिक और काला जादू पर आधारित था जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया था। सौरीश दिल्ली के शाहदरा के रहने वाले हैं और लॉकडॉउन के दौरान मुंबई में फंस गए थे। उनसे विशेष बातचीत की सोनू पचौरी ने –
प्रश्न – लॉकडाउन के दौरान आप मुंबई में फंस गए थे, इस दौरान किन – किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
उत्तर – मैं चुनौतियों से पिछले कई वर्षों से लड़ रहा हूं या यह कहूं की मुझे मुश्किलों से लडने की आदत सी बन गई है, मेरा मानना है कि अगर आप मुश्किल परिस्थितियों से जब तक लड़ना नहीं सीखेंगे तो आप आगे आने वाले समय से आप आंखें नहीं मिला सकते, यही मुश्किल समय हमें आने वाली हर कठिनाई से मजबूती से लड़ना सिखाता है। मैं जानता हूं कि मैं मुंबई में फंस गया था लेकिन मुंबई से दूर होने का ख्याल कभी मन में नहीं लाया। शायद यही वजह थी कि मेरा शौक मेरे सपने ने मुझे इतनी हिम्मत दी की मैं खुद को मुंबई से दूर नहीं कर सका।लॉकडॉउन जैसे माहौल में मैंने खुद को अभी तक यानी मार्च से अगस्त तक क्यूरेंटाइन किया हुआ है। लोगों से दूरी बनाए रखने के साथ साथ अहतिताय बरतता हूं। ईश्वर की कृपा से मुझे अभी तक कोई तकलीफ़ महसूस नहीं हुई है और अब जिंदगी आहिस्ता आहिस्ता पहले जैसी होने लगी है, शायद मैंने समझदारी बरती जो मैं मुंबई से अपने घर नहीं लौटा।मुंबई में मेरा कोई दोस्त नहीं है और ना ही रिश्तेदार बस लॉकडाउन के दौरान थोड़ा अकेलापन जरूर रहा क्योंकि शूटिंग भी रुकी हुई थी तो अकेले 4 दिवारी में वक़्त गुजारना थोड़ा मुश्किल रहा मगर उस दौरान मैंने घर में रहकर ही अपनी एक्टिंग को और बेहतर करने का प्रयास किया और साथ ही साथ लेखन में भी हाथ आजमाया।

प्रश्न – आपके लिए कालासुर को रोल प्ले करना कितना बड़ा चैलेंज था? इस दौरान आपको मेक अप संबंधित किन किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
उत्तर – यह रोल करियर के सबसे चुनौतपूर्ण रोल में से एक था। शूटिंग से पहले मुझे पेट भरकर खाना खा लेना होता था क्योंकि एक बार जब मेक अप हो गया तो मैं कुछ खा नहीं सकता था वरना मेरा मेक अप खराब हो सकता था। जब मेरा मेक अप किया जाता था तो उसमें ही सिर्फ 2 से 3 घंटे तक का समय लग जाता था और जो मुखौटा मुझे पहनाया जाता था उसके एक मुखौटे कि कीमत 20 हजार रुपए पड़ती थी और वह सिर्फ एक बार ही इस्तेमाल हो सकता था अगर इस दौरान मैं खाना खाता तो मुखौटा खराब हो सकता था और शूटिंग प्रभावित हो सकती थी। कॉस्ट्यूम इतनी भारी हुआ करती थी जैसे कोई बोझ रखा गया हो, कॉस्ट्यूम की गर्मी के साथ साथ सेट पर लाइट्स की गर्मी से भी परेशानी होती थी। कई बार 12-12 घंटे उसी कॉस्ट्यूम और मेक अप के साथ डबल शूटिंग करनी होती थी। इस दौरान मैं स्ट्रॉ के जरिए कुछ तरल पदार्थ ही पी सकता था या सेट पर फलों के छोटे – छोटे टुकड़े करके खाता था ताकि शरीर में किसी तरह की कोई कमजोरी ना आए और अपनी अपनी डायलॉग को दमदार आवाज़ दे सकूं।

प्रश्न – दिल्ली के शाहदरा से निकलकर मुंबई में कितना संघर्ष करना पड़ा?
उत्तर – सच कहूं मुझे मेरे सपनों को पूरा करने में किसी का सपोर्ट नहीं रहा। मुंबई तक आने के लिए कई जगह बहुत छोटे स्तर पर नौकरियां की क्योंकि मैं एक मिडिल क्लास परिवार से ताल्लुक रखता हूं जो एक रुपए को सौ पैसे समझकर खर्च करती है। मैंने पढ़ाई के साथ साथ ही मॉडलिंग भी की और उसके बाद नौकरी की लेकिन उसने मेरे अंदर के जुनून को बढ़ा दिया और मैंने मुंबई आने का फैसला लिया। साल 2010 की 10 अप्रैल को दोपहर 2 बजे का समय मैं कभी नहीं भूल सकता, यही वह वक़्त था जब मैंने मुंबई कि जमीन पर पहला कदम रखा था,मुंबई में मुझे लगभग 10 वर्ष पूरे हो गए हैं। इन 10 वर्षाें में अच्छे – बुरे दोनों तरह के लोगों से सामना हुआ। कुछ ऐसे दोस्त भी थे जिन्होंने बुरे वक़्त में साथ नहीं दिया। मैं मुंबई में एक वक़्त का खाना खाकर भी रहा, दोस्तों ने घर से भी निकाल दिया था, हर बात अगर आज सोचता हूं तो मायूस हो जाता हूं कि लोगों में इंसानियत बहुत कम बची है पर ईश्वर ने मेरा साथ दिया और मुझे छोटा – मोटा काम मिलने लगा। जैसे – जैसे काम मिलता गया दिल कि आग और ज्यादा सुलगती गई और मैंने मेहनत दुगनी कर दी। मैंने मुंबई में दोस्ती करने से मुंह फेर लिया और बस अकेला रहना शुरू कर दिया और सिर्फ अपने काम पर ध्यान दिया। लंबे संघर्ष के बाद ही सही पर मैं धीरे धीरे अपनी मंजिल के बहुत करीब आ गया हूं। अभी तो यात्रा शुरू हुई है लंबा सफर तय करना है।
प्रश्न – सौरिश सिंह अठवाल को फिल्मों का काम करने का मौका मिले तो वह फिल्मों को ही प्राथमिकता देंगे या सीरियल्स को?
उत्तर – मेरा मानना है कि समुंदर में घूमने का शौक रखते हैं तो अच्छा तैराक भी बनना होगा। इंडस्ट्री में फिल्म एक ऐसा मुकाम होता है जिन्हें करने के बाद नए स्ट्रगलर खुद को पूरी तरह कामयाब समझने लगते हैं लेकिन फिल्म करना इतना आसान नहीं होता जितना समझा जाता है या नए स्ट्रगलर समझते हैं। थोड़ी मेहनत के बाद फिल्मों में काम तो मिल जाता है पर वह छोटे – मोटे रोल ही होते हैं जिनमें आपके अंदर कितनी काबिलियत है वो दर्शकों तक नहीं दिखा पाते हो यानी आप एक भीड़ का हिस्सा बन जाते हो। अपना शत प्रतिशत देने के बाद भी गलती स्ट्रगलर की ही होती है क्योंकि वो जल्दी फिल्म्स या सीरियल्स में दिखने की चाहत में खुद को बिना परफेक्ट किए मैदान में उतार देते हैं और उसका नुकसान ये होता है कि सामने वाले की नजर में आप एक छोटे कलाकार बनकर ही रह जाते हैं। मेरा मानना है कि खुद को नाटकों या सीरियल्स में वक़्त दिया जाए जो कि आपकी एक्टिंग को और अधिक निखारती है। सीरियल्स में आपको कई ऐसे एक्टर , डायरेक्टर और तरह – तरह की कहानियों में काम करने का मौका मिलता है जिससे आपका टैलेंट और अधिक उभरता है। आप टेलीविजन पर तब भी दिखोगे, पैसा और पहचान भी कमाओगे। जब आप एक्टिंग का अनुभव के लेते हैं और आर्थिक रूप से भी मजबूत होते हैं तो फिल्म्स में अच्छे रोल की प्रतीक्षा भी कर सकते हैं और पूरी तैयारी के साथ जा सकते हैं। मैं भी लंबे समय से सीरियल कर रहा हूं और ये अब मेरी आमदनी बन चुकी है पर ऐसा नहीं है कि मैं फिल्में नहीं करना चाहता। मुझे फिल्म्स के ऑफर भी आते हैं पर मुझे मेरी पसंद का कोई रोल ऑफर नहीं हुआ है। इस कारण में फिल्म्स में नजर नहीं आता पर भविष्य में मुझे फिल्म्स के अच्छे रोल मिले तो मैं फिल्में जरूर करूंगा लेकिन सीरियल्स को भी प्राथमिकता दूंगा क्योंकि मेरे लिए दोनों ही काम हैं। ये कुछ एक्टर अपनी सोच बना लेते हैं जो दोनों में भेद भाव बना लेते हैं जिसके कई बार बुरे नतीजे भी सामने आते हैं। साथ ही मैं हर स्ट्रगलर को ये मैसेज देना चाहता हूं कि भले ही वो किसी भी फील्ड से जुड़ना चाहते हों, आप कभी हार ना मानना, कामयाबी को पाने की कोई उम्र नहीं होती, बस अपने लक्ष्य पर सटीक नजर बनाएं रखें।

प्रश्न – आपको आपकी फिटनेस के लिए भी जाना जाता है, लॉकडॉउन के दौरान देशभर में जिम बंद रहे इस दौरान आप खुद भी अनफिट हुए हैं, इस पर क्या कहेंगे?
उत्तर – लॉकडॉउन में जिम बंद हैं और मुंबई में अभी भी सरकार ने जिम खोलने की अनुमति नहीं दी है क्योंकि मैं एक सर्टिफाइड ट्रेनर भी हूं तो मैं जानता हूं कि पिछले 4-5 महीने में शरीर कमजोर हुआ है पर मुझे उससे कोई खासी परेशानी नहीं है। मुझे बॉडी बिल्डिंग का भी अनुभव है तो मैं खुद को 20-25 दिनों में रिकवर कर लेता हूं। जैसे ही जिम खुलने शुरू हो जाएंगे में पहले जैसा बेहतर दिखने लग जाऊंगा।