
दिल्ली में 14वें यूथ फेस्टिवल- कलर्स ऑफ इंडियां में शास्त्रीय संगीत की मशहूर गायिका परवीन सुल्ताना और भरतनाटयम गुरु सरोजा वैधनाथ सहित कई दिग्गज हस्तियों ने दर्शकों को अपने शानदार प्रस्तुति से मन मोहा।

यूथ फेस्टिवल – कलर्स ऑफ इंडिया के माध्यम से ली रिदम ने एकता और अखंडता को बढ़ावा देने के लिये संगीतमय सद्बभाव को बढ़ावा दिया। स्वामी विवेकानंद की 157वीं जयंती के अवसर पर देश की एकता और अखंडता को बरकरार रखने का प्रण लेते हुए और भारतीय संस्कृति की समृदि् और वैभव को प्रदर्शित करने के लिये ली रिदम और रिदम स्कूल ऑफ म्यूजिक ने नई दिल्ली के कमानी ऑडिटोरियम में 14वें वार्षिक संगीत महोत्सव को आयोजन किया।

यह कार्यक्रम शहनाई वादक पंडित राजेंद्र प्रसन्ना और वॉलियन वादक डॉ संतोष नाहर की खूबसूरत जुगलबंदी से सजाया गया। यह कार्यक्रम पंडित ज्वाला प्रसाद की याद में आयोजित किया गया था। रिनी मुखर्जी ने अपने ठुमरी गायन लागी नाही छूटे राम चाहे जिया जाए से पंडित ज्वाला प्रसाद को श्रदांजलि अर्पित की। उनके सुमुधर सुरों ने दर्शकों को मोहित कर लिया। मशहूर समकालीन नर्तक गुरु संतोष नायर ने अपनी प्रस्तुति साध्य के माध्यम से मिस्टिकल फॉरेस्ट नामक नृत्य नाटिका पेश की। इस प्रस्तुति में वनों में रहने वाले लोगों को विभिन्न अनुभव, गतिविधियां, भावनायों आदि को दिखाया गया। साथ ही गणेश नाटयालस की ओर से भरतनाटयम नृत्य पेश किया गया।

मशहूर प्लेबैकसिंगर और ली रिदम स्कूल ऑफ म्यूजिक की संस्थापक रिनी मुखर्जी ने कहा समाज के वंचितो शोषितों , गरीबों समेत युवा प्रतिभाओं को मशबूर शास्त्रीय घराने के गुरुओं की ओर से प्रशिक्षण दिलाना बेहद आवश्यक है। इसके इससे उनके व्यक्तिगत चारित्रिक और नैतिक गुणों का विकास होगा। हमें गर्व है कि ट्रस्ट के छात्र और अध्यापक जुलाई 2020 में लास वेगास में होने वाले अति प्रतिष्तिठत सांस्कृतिक कार्यक्रमों में से एक एनएबीसी 2020 में शामिल होगें।

ट्रस्ट के सदस्य देवाशीष साहा ने कहा, ट्रस्ट का मुख्य उदेश्य समाज के गरीब, वंचित और शोषित बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना हैष हम युवाओं को उनके प्रतिभा के प्रदर्शन के लिये इस तरह के ज्यादा से ज्यादा प्लेटर्फॉम प्रदान करना चाहते हैं। ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. श्यामलेंदु नियोगी ने कहा, हमें समाज के वंचितों, शोषितों और गरीबों को अपने कौशल विकास कार्यक्रम से आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास लगातार करने को जरुरत है, जिससे वह समाज को सही मायने में अपना योगदान देन के काबिल बन सकें। शिक्षा का यह अनोखा रुप शारीरिक और मानसिक दिव्यांगों में आत्मविश्वास भरने और उन्हें अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन में मदद कर सकता है।

ली रिदम स्कूल की स्थापना श्रीमती रिनी मुखर्जी के निर्देशों के तहत की गई थी। उन्होंने कॉमर्स और मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कियी है। वह एक बहुमुखी और प्रतिभावान प्लैबैक सिंगर हैं। रिनी को कई पुरस्कार मिल चुके हैं। जिसमें वुमन अचीवर्स अवॉर्ड, समाज रत्न अवार्ड और राजीव गांधी ग्लोबल एक्सिलेंस अवॉर्ड शामिल हैं। रिनी रिदम स्कूल ऑफ म्यूजिक के अध्यापकों के साथ अपने संगीत के छात्रों की प्रतिभा को निखारने का काम कर रही हैं।