पंख लगा लो उड़ जाओ फिर से गगन में
शायद मिल जाये उम्मींद भरी किरन
शायद मिल जाये फिर से चलने की उमंग।।
आसान कुछ भी नहीं होता ये समझ लो तुम
कोई भी रास्ता आसान नहीं होता, ये समझ लो तुम
फिर कहने दो जो कहता है
बोलने जो बोलता है।।
उठाओ अपना बस्ता सपनों भरा
रख लो उसे कांधे पर तुम,चलते रहो,चलते रहो
ना फिर तुम खुद की उम्र देखो
ना फिर तुम मुश्किल डगर देखो।।
जो बोले उसे बोलने दो,जो कहे उसे कहने दो
उठाकर चलो कांधे पर अपने सपनों का बस्ता
ये बस्ता फिर किसी के कहने से गिरे नहीं
ये बस्ता किसी के कहने से उतरे नहीं, फिसले नहीं।।
बस्ते से सपने कहीे ओझल न हो
बस्ते से कहीं सपने कम न हो
बना लो तुम भी जहां सपनों वाला
सजा लो तुम भी कल उम्मींदों वाला।।
आज है राह मैं, हजारों कांटे
कल फूल भी होंगे, तब दुनिया देखेगी बुलंदी तुम्हारी
तब दुनिया देखेगी, शोहरत तुम्हारी
पकडो कसकर बस्ते को, सपने कहीं टूटे ना
पकड़ो कसकर बस्ते को, कि उम्मींद कभी रुठे ना।।
जकड़कर रखो, हर ख़्वाहिश को
ठोकर के बाद भी, ख़्वाहिश छूटे ना
रख लो कांधे पर, सपनों वाला बस्ता
रख लो कांधे पर, उम्मींद वाला भरा बस्ता ।।
पंख लगा लो उड़ जाओ, फिर से गगन में
शायद मिल जाये,उम्मींद भरी किरन
शायद मिल जाये, फिर से चलने की उमंग।।
Writer- Kalpana Chauhan